राज्यसभा में मोदी सरकार पर भड़की प्रियंका चतुर्वेदी, ट्रेड डील पर उठाए गंभीर सवाल
India-US Trade Deal Controversy: प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि यह ‘ट्रेड डील’ नहीं बल्कि अमेरिका का फरमान है; किसानों और डेयरी पर असर, पारदर्शिता नहीं, ‘India First’ नीति पर सवाल।
- Written By: अक्षय साहू
Priyanka Chaturvedi Slams Modi Govt: प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस डील में भारत के उत्पादों पर 18% टैरिफ लगेगा, जबकि अमेरिकी उत्पादों पर 0% टैरिफ। यह “India First” नीति के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार “डी-एस्केलेशन” और भारत-पाकिस्तान के शांति समझौते की बात की, जबकि हमारे विदेश मंत्री वाशिंगटन में बैठे हैं और उन्हें डील का फ्रेमवर्क भी नहीं पता। कॉमर्स मिनिस्टर ने संसद में बयान नहीं दिया, बल्कि पहले मीडिया के सामने बात की, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि किसानों के हितों को भी ठेंगा दिखाया गया है, क्योंकि डेयरी और कृषि उत्पादों पर भी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे “ट्रेड डील” नहीं बल्कि अमेरिका का फरमान बताया। उन्होंने चाबहार पोर्ट के बजट आवंटन न होने और रूस-ईरान से तेल न खरीदने के फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से स्पष्टता और “India First” नीति का पालन करने की मांग की।
Priyanka Chaturvedi Slams Modi Govt: प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि इस डील में भारत के उत्पादों पर 18% टैरिफ लगेगा, जबकि अमेरिकी उत्पादों पर 0% टैरिफ। यह “India First” नीति के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार “डी-एस्केलेशन” और भारत-पाकिस्तान के शांति समझौते की बात की, जबकि हमारे विदेश मंत्री वाशिंगटन में बैठे हैं और उन्हें डील का फ्रेमवर्क भी नहीं पता। कॉमर्स मिनिस्टर ने संसद में बयान नहीं दिया, बल्कि पहले मीडिया के सामने बात की, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि किसानों के हितों को भी ठेंगा दिखाया गया है, क्योंकि डेयरी और कृषि उत्पादों पर भी प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे “ट्रेड डील” नहीं बल्कि अमेरिका का फरमान बताया। उन्होंने चाबहार पोर्ट के बजट आवंटन न होने और रूस-ईरान से तेल न खरीदने के फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से स्पष्टता और “India First” नीति का पालन करने की मांग की।
