‘मैं हारा हुआ सिपाही नहीं’… प्रशांत किशोर का भावुक बयान, वीडियो में कही बड़ी बात
Prashant Kishor Says: 'मैं हारा हुआ सिपाही नहीं हूं'— प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति, जन सुराज और जनता के समर्थन को लेकर बड़ा बयान दिया। देखें पूरा वीडियो।
- Written By: वंदना शर्मा
उनका कहना है कि बिहार में विपक्ष की भूमिका में जन सुराज सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन वे बिहार छोड़कर कहीं नहीं गए हैं और लगातार जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष करना जारी रहेगा। उन्होंने अपने द्वारा दिए गए बयांन में स्पष्ट करते हुए बताया है कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या विधायक बनना नहीं है, बल्कि यह तो बिहार की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाना है। उनका मानना है कि जनता को जाति और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सही नेतृत्व का चुनाव करना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने इसे भाजपा के नेतृत्व, विशेषकर सम्राट चौधरी की कार्यशैली और नीतियों पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा है। उनका तर्क एक यह भी है कि जनता को तय करना चाहिए कि क्या उन्हें सम्राट चौधरी का नेतृत्व स्वीकार्य है या नहीं। आपको बताते दें कि प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से अपील की है कि वे पिछले 3-4 सालों में किए गए उनके प्रयासों का आकलन करें और यदि उन्हें लगता है कि वे एक बेहतर विकल्प हैं, तभी उन्हें अपना समर्थन दें।
प्रशांत किशोर का तो यह भी मानना है कि वे ‘हारे हुए सिपाही’ नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा है और वे समाज के हर उस वर्ग के साथ खड़े हैं जिन पर व्यवस्था के कारण संकट आया है। प्रशांत कुमार ने और क्या कहा। यह जानने के लिए देखिए ये पूरा वीडियो…
उनका कहना है कि बिहार में विपक्ष की भूमिका में जन सुराज सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि हार-जीत राजनीति का हिस्सा है, लेकिन वे बिहार छोड़कर कहीं नहीं गए हैं और लगातार जनता के मुद्दों के लिए संघर्ष करना जारी रहेगा। उन्होंने अपने द्वारा दिए गए बयांन में स्पष्ट करते हुए बताया है कि जन सुराज का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना या विधायक बनना नहीं है, बल्कि यह तो बिहार की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाना है। उनका मानना है कि जनता को जाति और दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सही नेतृत्व का चुनाव करना चाहिए।
प्रशांत किशोर ने इसे भाजपा के नेतृत्व, विशेषकर सम्राट चौधरी की कार्यशैली और नीतियों पर एक जनमत संग्रह के रूप में देखा है। उनका तर्क एक यह भी है कि जनता को तय करना चाहिए कि क्या उन्हें सम्राट चौधरी का नेतृत्व स्वीकार्य है या नहीं। आपको बताते दें कि प्रशांत किशोर ने मतदाताओं से अपील की है कि वे पिछले 3-4 सालों में किए गए उनके प्रयासों का आकलन करें और यदि उन्हें लगता है कि वे एक बेहतर विकल्प हैं, तभी उन्हें अपना समर्थन दें।
प्रशांत किशोर का तो यह भी मानना है कि वे ‘हारे हुए सिपाही’ नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा है और वे समाज के हर उस वर्ग के साथ खड़े हैं जिन पर व्यवस्था के कारण संकट आया है। प्रशांत कुमार ने और क्या कहा। यह जानने के लिए देखिए ये पूरा वीडियो…
