चीन-पाकिस्तान में सस्ता हुआ पेट्रोल, तो भारत में क्यों नहीं घट रहे दाम? सामने आई इसके पीछे की असली वजह- VIDEO
Petrol-Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और ब्रेंट क्रूड के करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाने के बाद पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हुए हैं।
- Written By: मनोज आर्या
Why petrol diesel prices not decreasing in India: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और ब्रेंट क्रूड के करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाने के बाद जहां पाकिस्तान, चीन, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हुए हैं, वहीं भारत में कीमतें जस की तस बनी हुई हैं। इस अंतर की मुख्य वजह यह है कि ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक संकट के दौरान जब कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, तब भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। इस वजह से तेल कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था और अब कंपनियां सबसे पहले अपने उसी पुराने घाटे की भरपाई करने में जुटी हुई हैं। इसके अलावा भारत में ईंधन की दरें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि इनमें रिफाइनरी लागत, ट्रांसपोर्टेशन, डीलर कमीशन के साथ-साथ केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का भारी वैट शामिल होता है, जो सरकारी राजस्व का एक बड़ा जरिया है।
Why petrol diesel prices not decreasing in India: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और ब्रेंट क्रूड के करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर आ जाने के बाद जहां पाकिस्तान, चीन, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हुए हैं, वहीं भारत में कीमतें जस की तस बनी हुई हैं। इस अंतर की मुख्य वजह यह है कि ईरान-अमेरिका तनाव और वैश्विक संकट के दौरान जब कच्चा तेल 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था, तब भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक घरेलू कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की थी। इस वजह से तेल कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा था और अब कंपनियां सबसे पहले अपने उसी पुराने घाटे की भरपाई करने में जुटी हुई हैं। इसके अलावा भारत में ईंधन की दरें केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं होतीं, बल्कि इनमें रिफाइनरी लागत, ट्रांसपोर्टेशन, डीलर कमीशन के साथ-साथ केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकारों का भारी वैट शामिल होता है, जो सरकारी राजस्व का एक बड़ा जरिया है।
