5 साल की उम्र में पोलियो, फिर भी नहीं मानी हार… झंडू कुमार की कहानी करेगी भावुक-VIDEO
Commonwealth Games 2026: बिहार के झंडू कुमार ने ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 190 किलो वजन उठाकर भारत का पहला कांस्य पदक जीता। जानिए उनकी प्रेरणादायक कहानी।
- Written By: वंदना शर्मा
Para Powerlifting Jhandu Kumar: बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक खेल जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बन गई है।
झंडू कुमार बचपन में ही पोलियो की चपेट में आ गए थे। महज पांच साल की उम्र में शारीरिक चुनौती का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को नहीं छोड़ा। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून बरकरार रखा।
कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। ऐसे समय में झंडू कुमार ने परिवार का सहारा बनने के लिए सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा भी चलाया। दिनभर काम करने के बाद भी उन्होंने अपनी ट्रेनिंग नहीं छोड़ी और रोजाना जिम जाकर अभ्यास जारी रखा।
साल 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान झंडू कुमार के प्रदर्शन ने राष्ट्रीय कोच रजिंद्र सिंह राहेलू का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का अवसर मिला, जिसने उनके खेल करियर को नई दिशा दी।
ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक भी है, जिससे पूरे देश में खुशी की लहर है।
झंडू कुमार की कहानी यह संदेश देती है कि मजबूत इरादों, कठिन मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। गरीबी और शारीरिक अक्षमता जैसी कठिन परिस्थितियां भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकीं और आज वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। इस वीडियो को पूरा देखे…
Para Powerlifting Jhandu Kumar: बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ एक खेल जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल बन गई है।
झंडू कुमार बचपन में ही पोलियो की चपेट में आ गए थे। महज पांच साल की उम्र में शारीरिक चुनौती का सामना करने के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों को नहीं छोड़ा। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच भी उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून बरकरार रखा।
कोविड-19 महामारी के दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई। ऐसे समय में झंडू कुमार ने परिवार का सहारा बनने के लिए सब्जियां बेचीं और ई-रिक्शा भी चलाया। दिनभर काम करने के बाद भी उन्होंने अपनी ट्रेनिंग नहीं छोड़ी और रोजाना जिम जाकर अभ्यास जारी रखा।
साल 2023 में राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के दौरान झंडू कुमार के प्रदर्शन ने राष्ट्रीय कोच रजिंद्र सिंह राहेलू का ध्यान खींचा। इसके बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण का अवसर मिला, जिसने उनके खेल करियर को नई दिशा दी।
ग्लासको कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में झंडू कुमार ने पुरुषों की हैवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। यह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का पहला पदक भी है, जिससे पूरे देश में खुशी की लहर है।
झंडू कुमार की कहानी यह संदेश देती है कि मजबूत इरादों, कठिन मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। गरीबी और शारीरिक अक्षमता जैसी कठिन परिस्थितियां भी उनके हौसले को नहीं तोड़ सकीं और आज वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। इस वीडियो को पूरा देखे…
