“हिंदुस्तान में मुसलमान सुरक्षित नहीं”, सपा नेता का बड़ा बयान, धार्मिक अपमान पर 10 साल जेल की मांग
Abu Azmi Statement: सपा नेता अबू आजमी ने भारत में मुसलमानों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा है कि यहाँ मुसलमान होना गुनाह बन गया है। उन्होंने धार्मिक अपमान के खिलाफ कड़े कानून की वकालत की है।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Samajwadi Party के वरिष्ठ नेता अबू आजमी ने देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित भेदभाव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजहब के नाम पर हो रही नाइंसाफी और नफरती भाषणों को रोकने के लिए सरकारें गंभीर नहीं हैं, जिससे देश में ‘जंगल राज’ जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
अबू आजमी ने दावा किया कि वर्तमान समय में हिंदुस्तान में मुसलमान बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं और ऐसा लगता है कि इस देश में मुसलमान होना आज एक गुनाह बन गया है। उन्होंने व्यवस्था पर ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग इस्लाम के खिलाफ ‘गलीज अल्फाज’ (अपमानजनक शब्द) का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए प्रशासन ‘रेड कारपेट’ बिछाता है और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती। इसके विपरीत, यदि मुसलमान प्रदर्शन (एजिटेशन) करते हैं, तो मामूली पत्थर चलने पर भी उन पर धारा 307 जैसे कड़े केस लगाकर उन्हें सालों तक जेलों में डाल दिया जाता है। उन्होंने अमरावती और मालेगांव के उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सैकड़ों लोग पुलिस की इसी कार्रवाई के कारण जेलों में बंद रहे।
Samajwadi Party के वरिष्ठ नेता अबू आजमी ने देश में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे कथित भेदभाव पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मजहब के नाम पर हो रही नाइंसाफी और नफरती भाषणों को रोकने के लिए सरकारें गंभीर नहीं हैं, जिससे देश में ‘जंगल राज’ जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
अबू आजमी ने दावा किया कि वर्तमान समय में हिंदुस्तान में मुसलमान बिल्कुल सुरक्षित नहीं हैं और ऐसा लगता है कि इस देश में मुसलमान होना आज एक गुनाह बन गया है। उन्होंने व्यवस्था पर ‘दोहरे मापदंड’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग इस्लाम के खिलाफ ‘गलीज अल्फाज’ (अपमानजनक शब्द) का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए प्रशासन ‘रेड कारपेट’ बिछाता है और कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती। इसके विपरीत, यदि मुसलमान प्रदर्शन (एजिटेशन) करते हैं, तो मामूली पत्थर चलने पर भी उन पर धारा 307 जैसे कड़े केस लगाकर उन्हें सालों तक जेलों में डाल दिया जाता है। उन्होंने अमरावती और मालेगांव के उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सैकड़ों लोग पुलिस की इसी कार्रवाई के कारण जेलों में बंद रहे।
