राष्ट्रपति ने तोड़ा प्रोटोकॉल, अधिकारी ने छुए पैर, अयोध्या के लाल की शहादत की कहानी सुन रो पड़ा देश- VIDEO
Shashank Tiwari: शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की मां के चरणों में सेना अधिकारी झुका। साथी की जान बचाकर कुर्बान होने वाले वीर सपूत को मरणोपरांत कीर्ति चक्र सम्मान मिला है।
- Written By: अमन मौर्या
Lieutenant Shashank Tiwari Kirti Chakra: यह कहानी उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी वीर सपूत शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी के सर्वोच्च बलिदान और उनके परिवार के प्रति सम्मान की एक बेहद भावुक दास्तान है। सिक्किम के हाई अल्टीट्यूड एरिया में एक अभियान के दौरान पहाड़ी नदी पार करते समय साथी अग्निवीर स्टीफन सुब्बा का पैर फिसल गया था। लेफ्टिनेंट शशांक ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नदी में छलांग लगा दी और साथी सैनिक को सुरक्षित किनारे धकेल कर उसकी जान बचा ली, लेकिन वे खुद तेज धारा में बह गए और शहीद हो गए। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा गया।
राष्ट्रपति भवन में जब उनके नाम की घोषणा हुई, तो भावुक माता-पिता को संभालने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें पदक सौंपा। इसके बाद, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनके स्टाफ अधिकारियों ने शहीद के घर जाकर उनकी माता के चरण स्पर्श किए, जो देश की रक्षा के लिए मां के इस महान त्याग को एक सच्चा नमन है।
Lieutenant Shashank Tiwari Kirti Chakra: यह कहानी उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी वीर सपूत शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी के सर्वोच्च बलिदान और उनके परिवार के प्रति सम्मान की एक बेहद भावुक दास्तान है। सिक्किम के हाई अल्टीट्यूड एरिया में एक अभियान के दौरान पहाड़ी नदी पार करते समय साथी अग्निवीर स्टीफन सुब्बा का पैर फिसल गया था। लेफ्टिनेंट शशांक ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नदी में छलांग लगा दी और साथी सैनिक को सुरक्षित किनारे धकेल कर उसकी जान बचा ली, लेकिन वे खुद तेज धारा में बह गए और शहीद हो गए। उनकी इस अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन सैन्य सम्मान ‘कीर्ति चक्र’ से नवाजा गया।
राष्ट्रपति भवन में जब उनके नाम की घोषणा हुई, तो भावुक माता-पिता को संभालने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खुद प्रोटोकॉल तोड़कर उन्हें पदक सौंपा। इसके बाद, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और उनके स्टाफ अधिकारियों ने शहीद के घर जाकर उनकी माता के चरण स्पर्श किए, जो देश की रक्षा के लिए मां के इस महान त्याग को एक सच्चा नमन है।
