Mahakumbh 2025: कांटों पर सोते हैं ये बाबा…जानिए क्या है इसके पीछे का रहस्य, वीडियो में समझिए पूरी कहानी
बिहार के रहने वाले रमेश कुमार मांझी उर्फ 'कांटे वाले बाबा' उस वक्त लोगों की नजरों में आए जब उन्होंने बबूल के कांटों को बिछावन और चादर बनाकर उस पर लेट गए। उनकी तपस्या के साक्षी वहां मौजूद कई श्रद्धालु और लोग बने।
- Written By: अभिषेक सिंह
नवभारत डेस्क: प्रयागराज में आस्था का कुंभ महाकुंभ लगा है जहां देश-दुनिया से श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने के लिए संगम तट पर पहुंच रहे हैं। इस महाकुंभ के शुरू होने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का आगमन भी जारी है। ये साधु-संतों अपनी तपस्या और करतबों की वजह से लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक बाबा संगम तट पर बबूल के नुकीले कांटों पर लेटकर तपस्या करते नजर आए। बिहार के रहने वाले रमेश कुमार मांझी उर्फ ’कांटे वाले बाबा’ उस वक्त लोगों की नजरों में आए जब उन्होंने बबूल के कांटों को बिछावन और चादर बनाकर उस पर लेट गए। उनकी तपस्या के साक्षी वहां मौजूद कई श्रद्धालु और लोग बने। इस तपस्या के दौरान वे हाथ में डमरू लिए हुए आंखें बंद किए ध्यान मुद्रा में लेटे नजर आए। उनकी तपस्या को देख लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और कुछ श्रद्धालुओं ने उन्हें इस अवस्था में देखकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। ‘कांटे वाले बाबा’ को देखकर ऐसा लग सकता है कि उन्हें इससे दर्द होता होगा, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें इससे दर्द नहीं होता।
नवभारत डेस्क: प्रयागराज में आस्था का कुंभ महाकुंभ लगा है जहां देश-दुनिया से श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने के लिए संगम तट पर पहुंच रहे हैं। इस महाकुंभ के शुरू होने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का आगमन भी जारी है। ये साधु-संतों अपनी तपस्या और करतबों की वजह से लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन्हीं में से एक बाबा संगम तट पर बबूल के नुकीले कांटों पर लेटकर तपस्या करते नजर आए। बिहार के रहने वाले रमेश कुमार मांझी उर्फ ’कांटे वाले बाबा’ उस वक्त लोगों की नजरों में आए जब उन्होंने बबूल के कांटों को बिछावन और चादर बनाकर उस पर लेट गए। उनकी तपस्या के साक्षी वहां मौजूद कई श्रद्धालु और लोग बने। इस तपस्या के दौरान वे हाथ में डमरू लिए हुए आंखें बंद किए ध्यान मुद्रा में लेटे नजर आए। उनकी तपस्या को देख लोगों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया और कुछ श्रद्धालुओं ने उन्हें इस अवस्था में देखकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। ‘कांटे वाले बाबा’ को देखकर ऐसा लग सकता है कि उन्हें इससे दर्द होता होगा, लेकिन उन्होंने बताया कि उन्हें इससे दर्द नहीं होता।
