नेपाल से भारत तक फैली है 120 किलोमीटर की तीर्थयात्रा, इसे कहते हैं मिथिला का महाकुंभ
चार स्थानों पर रुकते हुए भारत तक फैली 120 किलोमीटर की तीर्थयात्रा को मिथिला का महाकुंभ भी कहा जाता है। शुक्रवार की सुबह जनकपुरधाम के गर्भगृह की परिक्रमा करने के बाद तीर्थयात्रा औपचारिक रूप से संपन्न हो गयी।
- Written By: विजय कुमार तिवारी
मां जानकी के पीहर मिथिला से आ रही ये झलकियां हैं, जहां इस समय माध्यमिक परिक्रमा जारी है। इसे ‘मिथिला का महाकुंभ’ भी कहा जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और परिक्रमा करते हैं। इसके बारे में बताया जा रहा है कि नेपाल के कचुरीधाम से मिथिला की पारंपरिक मध्यमा परिक्रमा प्रारंभ होती है और पूरे 15 दिनों तक चलती है। मिथिला के महाकुंभ के साथ-साथ श्रद्धालु होली के आनंद में भी झूमते दिखे। बताया जा रहा है कि चार स्थानों पर रुकते हुए भारत तक फैली 120 किलोमीटर की तीर्थयात्रा को मिथिला का महाकुंभ भी कहा जाता है। शुक्रवार की सुबह जनकपुरधाम के गर्भगृह की परिक्रमा करने के बाद तीर्थयात्रा औपचारिक रूप से संपन्न हो गयी।
मां जानकी के पीहर मिथिला से आ रही ये झलकियां हैं, जहां इस समय माध्यमिक परिक्रमा जारी है। इसे ‘मिथिला का महाकुंभ’ भी कहा जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और परिक्रमा करते हैं। इसके बारे में बताया जा रहा है कि नेपाल के कचुरीधाम से मिथिला की पारंपरिक मध्यमा परिक्रमा प्रारंभ होती है और पूरे 15 दिनों तक चलती है। मिथिला के महाकुंभ के साथ-साथ श्रद्धालु होली के आनंद में भी झूमते दिखे। बताया जा रहा है कि चार स्थानों पर रुकते हुए भारत तक फैली 120 किलोमीटर की तीर्थयात्रा को मिथिला का महाकुंभ भी कहा जाता है। शुक्रवार की सुबह जनकपुरधाम के गर्भगृह की परिक्रमा करने के बाद तीर्थयात्रा औपचारिक रूप से संपन्न हो गयी।
