MP के मंत्री के बिगड़े बोल, कार्यक्रम में नहीं आई तो काट दूंगा लाड़ली बहनों का नाम; मंच से दी खुली धमकी- VIDEO
Karan Singh Verma: मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी 'लाड़ली बहना योजना' को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इसके पीछे की वजह राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान है।
- Written By: मनोज आर्या
Madhya Pradesh Karan Singh Verma: मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सीहोर के इछावर में एक सार्वजनिक मंच से लाड़ली बहनों को परोक्ष रूप से धमकी देते हुए कहा कि जो बहनें सरकारी कार्यक्रमों में नहीं आएंगी, उनका नाम योजना से काट दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि गांव की 894 बहनों को ₹1500 महीना मिल रहा है, लेकिन कार्यक्रम में भीड़ कम होने पर उन्होंने सीईओ मैडम से रिपोर्ट भेजकर नाम काटने की बात कही। इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘तानाशाही’ और संविधान की शपथ का उल्लंघन बताया है। गौरतलब है कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने भी इसी तरह का बयान दिया था। जून 2023 से शुरू हुई इस योजना पर सरकार अब तक करीब 48,632 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। राज्य पर बढ़ते कर्ज और लाभार्थियों की घटती संख्या के बीच मंत्रियों के ऐसे ‘धमकी भरे’ बोलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Madhya Pradesh Karan Singh Verma: मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘लाड़ली बहना योजना’ को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सीहोर के इछावर में एक सार्वजनिक मंच से लाड़ली बहनों को परोक्ष रूप से धमकी देते हुए कहा कि जो बहनें सरकारी कार्यक्रमों में नहीं आएंगी, उनका नाम योजना से काट दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि गांव की 894 बहनों को ₹1500 महीना मिल रहा है, लेकिन कार्यक्रम में भीड़ कम होने पर उन्होंने सीईओ मैडम से रिपोर्ट भेजकर नाम काटने की बात कही। इस बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘तानाशाही’ और संविधान की शपथ का उल्लंघन बताया है। गौरतलब है कि हाल ही में कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने भी इसी तरह का बयान दिया था। जून 2023 से शुरू हुई इस योजना पर सरकार अब तक करीब 48,632 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। राज्य पर बढ़ते कर्ज और लाभार्थियों की घटती संख्या के बीच मंत्रियों के ऐसे ‘धमकी भरे’ बोलों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
