2026 या पत्थर युग? बड़वानी में झोली में बंधकर अस्पताल पहुंचा बीमार बच्चा, विकास के दावों की निकली हवा
Madhya Pradesh News: बड़वानी में विकास की खुली पोल। एंबुलेंस न होने पर बीमार बच्चे को झोली में लादकर 7 किमी पैदल चले ग्रामीण। आजादी के दशकों बाद भी सड़क के लिए तरस रहा यह गांव।
- Written By: सजल रघुवंशी
Barwani Health Crisis: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से विकास के दावों की पोल खोलती एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज 55 किलोमीटर दूर पार्टी ब्लॉक के पीपरकुंड गांव में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नदारद है। वनकुंडी फलिया के ग्रामीणों को एक बीमार 14 वर्षीय बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए कपड़े की झोली बनाकर उसे अपने कंधों पर लादना पड़ा और 7 किलोमीटर का पथरीला पहाड़ी रास्ता पैदल तय किया। ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस 7 किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ही आ पाती है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित होती है। बार-बार प्रशासन और नेताओं से गुहार लगाने के बावजूद 100 से अधिक परिवारों वाले इस आदिवासी अंचल में सड़क निर्माण नहीं हुआ है। यह घटना 2026 में आधुनिक भारत के विकास मॉडल पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
Barwani Health Crisis: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से विकास के दावों की पोल खोलती एक विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। जिला मुख्यालय से महज 55 किलोमीटर दूर पार्टी ब्लॉक के पीपरकुंड गांव में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा नदारद है। वनकुंडी फलिया के ग्रामीणों को एक बीमार 14 वर्षीय बच्चे को अस्पताल पहुंचाने के लिए कपड़े की झोली बनाकर उसे अपने कंधों पर लादना पड़ा और 7 किलोमीटर का पथरीला पहाड़ी रास्ता पैदल तय किया। ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस 7 किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ही आ पाती है, जिससे आपात स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित होती है। बार-बार प्रशासन और नेताओं से गुहार लगाने के बावजूद 100 से अधिक परिवारों वाले इस आदिवासी अंचल में सड़क निर्माण नहीं हुआ है। यह घटना 2026 में आधुनिक भारत के विकास मॉडल पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती है।
