VIDEO: पाकिस्तानी बम भी नहीं हिला सके ईंट, स्थानीय निवासियों ने बताई 1965 और 1971 के युद्ध के समय की तनोट माता मंदिर की कहानी
कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। आइए जानते है युद्ध में एक देवी के मंदिर की कहानी, जिसके चमत्कार के किस्से लोग आज तक नहीं भूल पाए हैं।
- Written By: आकाश मसने
कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ कई समझौते भी बंद कर दिए हैं। ब्रिटिश हुकूमत से आजादी और बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार इस तरह तनाव की स्थिति बन चुकी है। दोनों देशों के बीच तीन बार आमने-सामने की जंग हुई। जिसमें पाकिस्तान को भारतीय सेना के आगे सरेंडर करना पड़ा। साल 1965 में भी भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा युद्ध हुआ था। इस युद्ध में एक देवी के मंदिर की कहानी भी दर्ज है, जिसके चमत्कार के किस्से आज तक लोग नहीं भूल पाए हैं। तनोट माता का मंदिर राजस्थान के जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में जैसलमेर के भाटी राजपूत शासक महारावल लोनकावत ने करवाया था। यह मंदिर तनोट माता को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान इस मंदिर के चमत्कार आज भी पाकिस्तानी सेना के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं।
कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे के साथ कई समझौते भी बंद कर दिए हैं। ब्रिटिश हुकूमत से आजादी और बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई बार इस तरह तनाव की स्थिति बन चुकी है। दोनों देशों के बीच तीन बार आमने-सामने की जंग हुई। जिसमें पाकिस्तान को भारतीय सेना के आगे सरेंडर करना पड़ा। साल 1965 में भी भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ा युद्ध हुआ था। इस युद्ध में एक देवी के मंदिर की कहानी भी दर्ज है, जिसके चमत्कार के किस्से आज तक लोग नहीं भूल पाए हैं। तनोट माता का मंदिर राजस्थान के जैसलमेर से करीब 120 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में जैसलमेर के भाटी राजपूत शासक महारावल लोनकावत ने करवाया था। यह मंदिर तनोट माता को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है। 1965 और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान इस मंदिर के चमत्कार आज भी पाकिस्तानी सेना के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं।
