Uttarakhand News Shop Name Controversy: उत्तराखंड के कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम की दुकान के बोर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस मामले में दुकानदार का पक्ष लेने वाले स्थानीय युवक मोहम्मद दीपक ने अब एक वीडियो के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है।
मोहम्मद दीपक के अनुसार, बजरंग दल से जुड़े कुछ युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्हें ‘सबक सिखाने’ के लिए कोटद्वार में इकट्ठा होने का आह्वान किया गया था। दीपक ने बताया कि उनके परिचितों ने यह पोस्ट उन्हें भेजी, जिसे उन्होंने तुरंत व्हाट्सएप के जरिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भेजकर सूचित कर दिया था। उन्होंने पुलिस से स्पष्ट कहा था कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी क्योंकि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
दीपक का आरोप है कि करीब 150 से 200 बाहरी युवक दूसरे शहरों से कोटद्वार पहुंचे और लगभग 5-6 घंटे तक शहर में घूम-घूमकर नारेबाजी करते रहे। उनके अनुसार, इन लोगों ने न केवल उन्हें बल्कि उनके परिवार और मां-बहन को भी अपशब्द कहे। दीपक ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को इस बात की पहले से जानकारी थी, तो इन बाहरी लोगों को शहर में प्रवेश करने और हंगामा करने से क्यों नहीं रोका गया?
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के बजाय खुद उन्हें (दीपक को) ही थाने ले जाकर दो-तीन घंटे तक बैठाए रखा। दीपक का कहना है कि वे वहीं के स्थानीय निवासी हैं, फिर भी पुलिस ने बाहर से आए लोगों पर जोर चलाने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया और डांट-फटकार की।
Uttarakhand News Shop Name Controversy: उत्तराखंड के कोटद्वार में ‘बाबा’ नाम की दुकान के बोर्ड को लेकर शुरू हुआ विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। इस मामले में दुकानदार का पक्ष लेने वाले स्थानीय युवक मोहम्मद दीपक ने अब एक वीडियो के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है।
मोहम्मद दीपक के अनुसार, बजरंग दल से जुड़े कुछ युवकों ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की थी, जिसमें उन्हें ‘सबक सिखाने’ के लिए कोटद्वार में इकट्ठा होने का आह्वान किया गया था। दीपक ने बताया कि उनके परिचितों ने यह पोस्ट उन्हें भेजी, जिसे उन्होंने तुरंत व्हाट्सएप के जरिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भेजकर सूचित कर दिया था। उन्होंने पुलिस से स्पष्ट कहा था कि यदि उनके साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी क्योंकि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं।
दीपक का आरोप है कि करीब 150 से 200 बाहरी युवक दूसरे शहरों से कोटद्वार पहुंचे और लगभग 5-6 घंटे तक शहर में घूम-घूमकर नारेबाजी करते रहे। उनके अनुसार, इन लोगों ने न केवल उन्हें बल्कि उनके परिवार और मां-बहन को भी अपशब्द कहे। दीपक ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को इस बात की पहले से जानकारी थी, तो इन बाहरी लोगों को शहर में प्रवेश करने और हंगामा करने से क्यों नहीं रोका गया?
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के बजाय खुद उन्हें (दीपक को) ही थाने ले जाकर दो-तीन घंटे तक बैठाए रखा। दीपक का कहना है कि वे वहीं के स्थानीय निवासी हैं, फिर भी पुलिस ने बाहर से आए लोगों पर जोर चलाने के बजाय उन पर ही दबाव बनाया और डांट-फटकार की।