किरेन रिजिजू के बयान से मचा सियासी भूचाल! मुस्लिमों की आबादी को लेकर कह दी ऐसी बात, भड़क उठे विपक्ष के नेता
Kiren Rijiju Statement on Muslim Population: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के मुस्लिम और पारसी समुदाय की जनसंख्या को लेकर दिए गए एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर बहस तेज हो गई है।
- Written By: अक्षय साहू
Kiren Rijiju Controversial Comment on Muslim Population: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक बयान ने इन दिनों एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। रिजिजू हाल ही में एक कार्यक्रम में भारत की बढ़ती जनसंख्या को लेकर भाषणा दे रहे थे, इस दौरान उन्होंने मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या को लेकर ऐसा कुछ कहा जिससे विवाद खड़ा हो गया। किरेन रिजिजू ने कहा कि, भारत में मुसलमानों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है, जबकि पारसी समुदाय की आबादी लगभग 52-53 हजार के आसपास रह गई है। दोनों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। यदि मुसलमानों की आबादी को एक अलग राष्ट्र माना जाए, तो वह दुनिया का छठा सबसे बड़ा राष्ट्र बन सकता है। दूसरी ओर पारसी समुदाय की संख्या इतनी कम है कि उसे एक छोटे कस्बे या बड़े गांव की आबादी के बराबर माना जा सकता है। भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा इसलिए दिया गया क्योंकि देश में हिंदुओं की आबादी लगभग 80 प्रतिशत है, जबकि स्वतंत्रता के समय यह लगभग 85 प्रतिशत थी। समय के साथ हिंदुओं का प्रतिशत घटा है, हालांकि उनकी कुल संख्या बढ़ी है। इसके पीछे कई सामाजिक और जनसांख्यिकीय कारण हैं, जिन पर यहां विस्तार से चर्चा नहीं की जा रही है।
Kiren Rijiju Controversial Comment on Muslim Population: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक बयान ने इन दिनों एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। रिजिजू हाल ही में एक कार्यक्रम में भारत की बढ़ती जनसंख्या को लेकर भाषणा दे रहे थे, इस दौरान उन्होंने मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या को लेकर ऐसा कुछ कहा जिससे विवाद खड़ा हो गया। किरेन रिजिजू ने कहा कि, भारत में मुसलमानों की संख्या 20 करोड़ से अधिक है, जबकि पारसी समुदाय की आबादी लगभग 52-53 हजार के आसपास रह गई है। दोनों को अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त है। यदि मुसलमानों की आबादी को एक अलग राष्ट्र माना जाए, तो वह दुनिया का छठा सबसे बड़ा राष्ट्र बन सकता है। दूसरी ओर पारसी समुदाय की संख्या इतनी कम है कि उसे एक छोटे कस्बे या बड़े गांव की आबादी के बराबर माना जा सकता है। भारत में अल्पसंख्यक का दर्जा इसलिए दिया गया क्योंकि देश में हिंदुओं की आबादी लगभग 80 प्रतिशत है, जबकि स्वतंत्रता के समय यह लगभग 85 प्रतिशत थी। समय के साथ हिंदुओं का प्रतिशत घटा है, हालांकि उनकी कुल संख्या बढ़ी है। इसके पीछे कई सामाजिक और जनसांख्यिकीय कारण हैं, जिन पर यहां विस्तार से चर्चा नहीं की जा रही है।
