Madhya Pradesh News: अशोकनगर में आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक बेहद संवेदनशील और सख्त अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन पर जब कलेक्टर साकेत मालवीय जनता द्वारा दिए गए आवेदनों को बेतरतीब ढंग से एक थैले में भर रहे थे, तब सिंधिया ने उन्हें तुरंत टोक दिया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से ही कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि “ये केवल कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि लोगों की उम्मीदें हैं और इन्हें सोने के समान संभाल कर रखा जाना चाहिए। सिंधिया ने प्रशासन को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए स्पष्ट किया कि आवेदन किसी व्यक्ति की पीड़ा और संघर्ष की कहानी होते हैं, जिन्हें लापरवाही से रखना उनकी भावनाओं का अनादर करना है। मंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद कलेक्टर ने तुरंत सभी आवेदनों को व्यवस्थित किया। यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है और एक बड़ा संदेश देती है कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे पूरे सम्मान के साथ निभाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर सिंधिया के इस ‘जन-हितैषी’ रुख की काफी सराहना हो रही है।
Madhya Pradesh News: अशोकनगर में आयोजित एक जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक बेहद संवेदनशील और सख्त अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के समापन पर जब कलेक्टर साकेत मालवीय जनता द्वारा दिए गए आवेदनों को बेतरतीब ढंग से एक थैले में भर रहे थे, तब सिंधिया ने उन्हें तुरंत टोक दिया। उन्होंने सार्वजनिक मंच से ही कलेक्टर को फटकार लगाते हुए कहा कि “ये केवल कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि लोगों की उम्मीदें हैं और इन्हें सोने के समान संभाल कर रखा जाना चाहिए। सिंधिया ने प्रशासन को उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हुए स्पष्ट किया कि आवेदन किसी व्यक्ति की पीड़ा और संघर्ष की कहानी होते हैं, जिन्हें लापरवाही से रखना उनकी भावनाओं का अनादर करना है। मंत्री के इस हस्तक्षेप के बाद कलेक्टर ने तुरंत सभी आवेदनों को व्यवस्थित किया। यह घटना प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को उजागर करती है और एक बड़ा संदेश देती है कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे पूरे सम्मान के साथ निभाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर सिंधिया के इस ‘जन-हितैषी’ रुख की काफी सराहना हो रही है।