जंग के बीच क्यों चर्चा में है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? जानें दुनिया की इस लाइफलाइन का पूरा इतिहास- VIDEO
Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है।
- Written By: मनोज आर्या
Strait of Hormuz History and Significance: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) यहीं से गुजरती है। हालिया संघर्ष के दौरान ईरानी सेना द्वारा यहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों और रास्ते को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक शेयर बाजार और तेल की कीमतों में उथल-पुथल मचा दी है। इस वीडियो में होर्मुज नाम की उत्पत्ति और इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है। ‘होर्मुज’ नाम की जड़ें फारसी शब्द ‘अहूरा मजदा’ (ईश्वर) से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐतिहासिक रूप से, 10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच होर्मुज एक समृद्ध साम्राज्य था, जिसे ‘फारस की खाड़ी की चाबी’ कहा जाता था। दिलचस्प बात यह है कि मुगल शासक बाबर की आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में भी इस रास्ते का उल्लेख मिलता है, जहां फरगना से बादाम जैसे व्यापारिक सामान इसी मार्ग से दुनिया भर में भेजे जाते थे।
Strait of Hormuz History and Significance: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और भारी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) यहीं से गुजरती है। हालिया संघर्ष के दौरान ईरानी सेना द्वारा यहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमलों और रास्ते को बंद करने की धमकियों ने वैश्विक शेयर बाजार और तेल की कीमतों में उथल-पुथल मचा दी है। इस वीडियो में होर्मुज नाम की उत्पत्ति और इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला गया है। ‘होर्मुज’ नाम की जड़ें फारसी शब्द ‘अहूरा मजदा’ (ईश्वर) से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐतिहासिक रूप से, 10वीं से 17वीं शताब्दी के बीच होर्मुज एक समृद्ध साम्राज्य था, जिसे ‘फारस की खाड़ी की चाबी’ कहा जाता था। दिलचस्प बात यह है कि मुगल शासक बाबर की आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में भी इस रास्ते का उल्लेख मिलता है, जहां फरगना से बादाम जैसे व्यापारिक सामान इसी मार्ग से दुनिया भर में भेजे जाते थे।
