हाथरस के इस पिता को सलाम! दिव्यांग बेटी के सपनों के लिए अपनी पीठ को बनाया कंधा, देखें यह वायरल VIDEO
Hathras News: हाथरस जिले से पिता और बेटी के अटूट रिश्ते की एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। प्यारेलाल अपनी दिव्यांग बेटी को पीठ पर बैठाकर यूपी बोर्ड की परीक्षा दिलाने सेंटर लेकर पहुंचे।
- Written By: मनोज आर्या
Hathras Viral Video Father Daughter: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से पिता और बेटी के अटूट रिश्ते की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है। पेशे से मजदूर प्यारेलाल अपनी दिव्यांग बेटी मान्या को पीठ पर लादकर यूपी बोर्ड हाई स्कूल की परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे। मान्या जब नौवीं कक्षा में थी, तब एक मशीन हादसे में उसने अपना पैर गँवा दिया था, लेकिन इस शारीरिक कमी ने उसके हौसले को कम नहीं होने दिया। प्यारेलाल प्रतिदिन मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और अपनी बेटी के सपनों को साकार करने के लिए उसे खुद अपनी पीठ पर उठाकर स्कूल और परीक्षा केंद्र तक ले जाते हैं। सिकंदरा राव तहसील के आर्या कन्या इंटर कॉलेज में जब यह पिता अपनी बेटी को भविष्य की परीक्षा दिलाने पहुँचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मान्या का कहना है कि भले ही उसके पास पैर नहीं हैं, लेकिन पिता का सहारा और उसका खुद का जज्बा उसे मंजिल तक जरूर पहुँचाएगा। प्यारेलाल का एकमात्र सपना अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वह समाज में सम्मान के साथ जी सके।
Hathras Viral Video Father Daughter: उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले से पिता और बेटी के अटूट रिश्ते की एक बेहद भावुक और प्रेरणादायी तस्वीर सामने आई है। पेशे से मजदूर प्यारेलाल अपनी दिव्यांग बेटी मान्या को पीठ पर लादकर यूपी बोर्ड हाई स्कूल की परीक्षा दिलाने परीक्षा केंद्र पहुंचे। मान्या जब नौवीं कक्षा में थी, तब एक मशीन हादसे में उसने अपना पैर गँवा दिया था, लेकिन इस शारीरिक कमी ने उसके हौसले को कम नहीं होने दिया। प्यारेलाल प्रतिदिन मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं और अपनी बेटी के सपनों को साकार करने के लिए उसे खुद अपनी पीठ पर उठाकर स्कूल और परीक्षा केंद्र तक ले जाते हैं। सिकंदरा राव तहसील के आर्या कन्या इंटर कॉलेज में जब यह पिता अपनी बेटी को भविष्य की परीक्षा दिलाने पहुँचा, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। मान्या का कहना है कि भले ही उसके पास पैर नहीं हैं, लेकिन पिता का सहारा और उसका खुद का जज्बा उसे मंजिल तक जरूर पहुँचाएगा। प्यारेलाल का एकमात्र सपना अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वह समाज में सम्मान के साथ जी सके।
