Gwalior Mother Killed Son Case: मध्य प्रदेश के ग्वालियर (ठाटीपुर थाना क्षेत्र) से ममता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। अप्रैल 2023 में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिए जाने के बाद अपने बेटे को छत से नीचे फेंक दिया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में न्यायालय ने अब अपना फैसला सुनाते हुए मां को आजीवन कारावास की सजा दी है।
यह पूरी घटना अप्रैल 2023 की है, जब ठाटीपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली ज्योति राठौर अपने प्रेमी उदय के साथ छत पर आपत्तिजनक स्थिति में थी। इसी दौरान ज्योति का बेटा वहां पहुंच गया और उसने अपनी मां को प्रेमी के साथ देख लिया। पकड़े जाने और बदनामी के डर से ज्योति और उसके प्रेमी उदय ने मिलकर मासूम बच्चे को छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
इस मामले की सुनवाई माननीय जिला न्यायाधीश के न्यायालय में संपन्न हुई। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पारिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) पेश किए। न्यायालय ने इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए मां ज्योति राठौर को अपने ही बच्चे की हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास (उम्र कैद) की सजा सुनाई। हालांकि, मामले में सह-आरोपी रहे प्रेमी उदय को साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने बरी कर दिया।
Gwalior Mother Killed Son Case: मध्य प्रदेश के ग्वालियर (ठाटीपुर थाना क्षेत्र) से ममता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। अप्रैल 2023 में एक महिला ने अपने प्रेमी के साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिए जाने के बाद अपने बेटे को छत से नीचे फेंक दिया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इस मामले में न्यायालय ने अब अपना फैसला सुनाते हुए मां को आजीवन कारावास की सजा दी है।
यह पूरी घटना अप्रैल 2023 की है, जब ठाटीपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली ज्योति राठौर अपने प्रेमी उदय के साथ छत पर आपत्तिजनक स्थिति में थी। इसी दौरान ज्योति का बेटा वहां पहुंच गया और उसने अपनी मां को प्रेमी के साथ देख लिया। पकड़े जाने और बदनामी के डर से ज्योति और उसके प्रेमी उदय ने मिलकर मासूम बच्चे को छत से नीचे फेंक दिया। ऊंचाई से गिरने के कारण बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
इस मामले की सुनवाई माननीय जिला न्यायाधीश के न्यायालय में संपन्न हुई। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पारिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) पेश किए। न्यायालय ने इन साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को आधार मानते हुए मां ज्योति राठौर को अपने ही बच्चे की हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास (उम्र कैद) की सजा सुनाई। हालांकि, मामले में सह-आरोपी रहे प्रेमी उदय को साक्ष्यों के अभाव में न्यायालय ने बरी कर दिया।