गुना जिला अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर: स्ट्रेचर नहीं मिला तो बीमार पिता को कंधे पर ढोने को मजबूर हुआ बेटा
MP News: मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। स्ट्रेचर और स्टाफ की मदद न मिलने पर एक बेटे को अपने 75 वर्षीय बीमार पिता को कंधे पर उठाकर अस्पताल में भटकना पड़ा।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Guna District Hospital: मध्य प्रदेश के गुना से संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाती है। यहाँ एक बेटा अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को इलाज दिलाने के लिए कंधे पर लादकर वार्ड दर वार्ड भटकता रहा, लेकिन अस्पताल के किसी भी स्टाफ ने उसकी मदद नहीं की।
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: न स्ट्रेचर मिला, न वार्ड बॉय
मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की एक बेहद शर्मनाक और हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। सडूंगा गांव का रहने वाला मुनेश रघुवंशी (40) अपने 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता इमरत सिंह को गंभीर हालत में इलाज दिलाने के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा था। इमरत सिंह हाइपरटेंशन और सांस लेने की तकलीफ से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनकी स्थिति नाजुक थी।
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अस्पताल पहुंचने के बाद मुनेश ने इलाज के लिए पर्चा भी बनवाया, लेकिन उसे मरीज को वार्ड तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही किसी वार्ड बॉय ने उसकी मदद की। मुनेश ने बताया कि उसने वहां मौजूद स्टाफ से कई बार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। अंततः, बेबस होकर मुनेश ने अपने बीमार पिता को अपने कंधे पर बिठाया और अस्पताल की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की मंजिल की ओर चल पड़ा।
Guna District Hospital: मध्य प्रदेश के गुना से संवेदनहीनता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाती है। यहाँ एक बेटा अपने गंभीर रूप से बीमार पिता को इलाज दिलाने के लिए कंधे पर लादकर वार्ड दर वार्ड भटकता रहा, लेकिन अस्पताल के किसी भी स्टाफ ने उसकी मदद नहीं की।
संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: न स्ट्रेचर मिला, न वार्ड बॉय
मध्य प्रदेश के गुना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की एक बेहद शर्मनाक और हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। सडूंगा गांव का रहने वाला मुनेश रघुवंशी (40) अपने 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता इमरत सिंह को गंभीर हालत में इलाज दिलाने के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा था। इमरत सिंह हाइपरटेंशन और सांस लेने की तकलीफ से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनकी स्थिति नाजुक थी।
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अस्पताल पहुंचने के बाद मुनेश ने इलाज के लिए पर्चा भी बनवाया, लेकिन उसे मरीज को वार्ड तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही किसी वार्ड बॉय ने उसकी मदद की। मुनेश ने बताया कि उसने वहां मौजूद स्टाफ से कई बार गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी। अंततः, बेबस होकर मुनेश ने अपने बीमार पिता को अपने कंधे पर बिठाया और अस्पताल की सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की मंजिल की ओर चल पड़ा।
