Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में एक नया समीकरण बनता नजर आ रहा है। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की पूर्व सहयोगी और एनजीओ संचालक डॉ. रोहिणी घावरी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया है। स्विट्जरलैंड से पीएचडी पूरी करने के बाद रोहिणी जून में भारत लौटेंगी और पूरे उत्तर प्रदेश में 200 जनसभाएं कर ‘नॉन-जाटव’ दलित समुदायों जैसे वाल्मीकि, पासी और कोरी को एकजुट करने का अभियान चलाएंगी। उनका मुख्य उद्देश्य इन समुदायों को 2027 के विधानसभा चुनाव में उचित राजनीतिक भागीदारी दिलाना है। रोहिणी ने दावा किया है कि अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर से गठबंधन न करने का भरोसा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रोहिणी की एंट्री से जहाँ एक तरफ सपा का ‘PDA’ फार्मूला मजबूत होगा, वहीं दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद के लिए अपने कोर दलित वोट बैंक को बचाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में एक नया समीकरण बनता नजर आ रहा है। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की पूर्व सहयोगी और एनजीओ संचालक डॉ. रोहिणी घावरी ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के साथ हाथ मिलाने का फैसला किया है। स्विट्जरलैंड से पीएचडी पूरी करने के बाद रोहिणी जून में भारत लौटेंगी और पूरे उत्तर प्रदेश में 200 जनसभाएं कर ‘नॉन-जाटव’ दलित समुदायों जैसे वाल्मीकि, पासी और कोरी को एकजुट करने का अभियान चलाएंगी। उनका मुख्य उद्देश्य इन समुदायों को 2027 के विधानसभा चुनाव में उचित राजनीतिक भागीदारी दिलाना है। रोहिणी ने दावा किया है कि अखिलेश यादव ने चंद्रशेखर से गठबंधन न करने का भरोसा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रोहिणी की एंट्री से जहाँ एक तरफ सपा का ‘PDA’ फार्मूला मजबूत होगा, वहीं दूसरी तरफ चंद्रशेखर आजाद के लिए अपने कोर दलित वोट बैंक को बचाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।