दिल्ली में मालवीय नगर के होटल में जिंदा जले 21 लोग, हादसे के बाद चर्चा में आया अंग्रेजों का ‘लाल डोरा’, VIDEO
Delhi Lal Dora Area: दिल्ली के मालवीय नगर होटल में भयावह अग्निकांड के बाद लाल डोरा शब्द चर्चा में आ गया है। इस हादसे में 12 विदेशी नागरिकों सहित 21 की दर्दनाक मौत हो गई।
- Written By: अमन मौर्या
Delhi Malviya Nagar Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में 3 जून को भीषण आग लग गई, जिसमें 12 विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। पांच मंजिला इस होटल में एंट्री और एग्जिट का सिर्फ एक ही संकरा गेट था, जबकि खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं, जिससे यह इमारत मौत का जाल बन गई। इस भयावह हादसे के बाद ‘लाल डोरा’ इलाका एक बार फिर देशव्यापी चर्चा में आ गया है।
दरअसल, साल 1908 में ब्रिटिश शासन ने राजस्व नक्शों पर गांवों की आबादी और कृषि भूमि को अलग दिखाने के लिए लाल रंग की रेखा खींची थी, जिसे लाल डोरा कहा गया। इन इलाकों को लंबे समय तक नगर निगम के सख्त भवन नियमों और नक्शा स्वीकृति से छूट मिली हुई थी। जमीनी हकीकत यह है कि आज भी दिल्ली के करीब 357 लाल डोरा गांवों में बिना फायर एनओसी और सुरक्षा नियमों के अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जो बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं।
Delhi Malviya Nagar Hotel Fire: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ होटल में 3 जून को भीषण आग लग गई, जिसमें 12 विदेशी नागरिकों सहित 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। पांच मंजिला इस होटल में एंट्री और एग्जिट का सिर्फ एक ही संकरा गेट था, जबकि खिड़कियां स्थायी रूप से सील थीं, जिससे यह इमारत मौत का जाल बन गई। इस भयावह हादसे के बाद ‘लाल डोरा’ इलाका एक बार फिर देशव्यापी चर्चा में आ गया है।
दरअसल, साल 1908 में ब्रिटिश शासन ने राजस्व नक्शों पर गांवों की आबादी और कृषि भूमि को अलग दिखाने के लिए लाल रंग की रेखा खींची थी, जिसे लाल डोरा कहा गया। इन इलाकों को लंबे समय तक नगर निगम के सख्त भवन नियमों और नक्शा स्वीकृति से छूट मिली हुई थी। जमीनी हकीकत यह है कि आज भी दिल्ली के करीब 357 लाल डोरा गांवों में बिना फायर एनओसी और सुरक्षा नियमों के अवैध रूप से बहुमंजिला इमारतें खड़ी की जा रही हैं, जो बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं।
