छतरपुर में ‘लाल बत्ती’ का उतरा भूत: डीटीओ साहब की प्राइवेट कार पर चला हंटर, 500 का चालान और भारी बेइज्जती
Chhatarpur DTO Fine: मध्य प्रदेश के छतरपुर में जिला कौशालय अधिकारी (DTO) को अपनी निजी गाड़ी पर अवैध रूप से लाल-नीली बत्ती लगाकर रसूख दिखाना महंगा पड़ा। प्रशासन ने मौके पर बत्ती उतरवाकर चालान काटा।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
Chhatarpur DTO Red Light Fine Case: छतरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला कौशालय अधिकारी विनोद श्रीवास्तव की निजी कार पर अवैध बत्ती लगी मिली। केंद्र सरकार के 2017 के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस कृत्य पर कलेक्टर के निर्देश के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया और वीआईपी कल्चर को करारा सबक सिखाया।
छतरपुर में ‘लाल बत्ती का भूत उतर गया’- यह जुमला अब हर किसी की जुबान पर है। दरअसल, यह मामला वीआईपी कल्चर की उस पुरानी बीमारी से जुड़ा है, जहाँ रसूखदार लोग सायरन और बत्ती के दम पर ट्रैफिक में अपना रास्ता बनवाते थे। जिला कौशालय अधिकारी (DTO) विनोद श्रीवास्तव अपनी निजी गाड़ी पर अवैध लाल-नीली बत्ती लगाकर शहर में घूम रहे थे, जो कि केंद्र सरकार द्वारा 2017 में वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए बनाए गए नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, अधिकारी इस बत्ती का उपयोग सड़क पर अपना प्रभाव दिखाने के लिए करते थे। दिलचस्प बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय के किसी भी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के वाहन पर ऐसी कोई बत्ती नहीं लगी थी, जिससे डीटीओ के इस कृत्य पर लगातार सवाल उठ रहे थे और यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया था।
Chhatarpur DTO Red Light Fine Case: छतरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला कौशालय अधिकारी विनोद श्रीवास्तव की निजी कार पर अवैध बत्ती लगी मिली। केंद्र सरकार के 2017 के नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले इस कृत्य पर कलेक्टर के निर्देश के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया और वीआईपी कल्चर को करारा सबक सिखाया।
छतरपुर में ‘लाल बत्ती का भूत उतर गया’- यह जुमला अब हर किसी की जुबान पर है। दरअसल, यह मामला वीआईपी कल्चर की उस पुरानी बीमारी से जुड़ा है, जहाँ रसूखदार लोग सायरन और बत्ती के दम पर ट्रैफिक में अपना रास्ता बनवाते थे। जिला कौशालय अधिकारी (DTO) विनोद श्रीवास्तव अपनी निजी गाड़ी पर अवैध लाल-नीली बत्ती लगाकर शहर में घूम रहे थे, जो कि केंद्र सरकार द्वारा 2017 में वीआईपी कल्चर खत्म करने के लिए बनाए गए नियमों का स्पष्ट उल्लंघन था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, अधिकारी इस बत्ती का उपयोग सड़क पर अपना प्रभाव दिखाने के लिए करते थे। दिलचस्प बात यह है कि कलेक्टर कार्यालय के किसी भी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के वाहन पर ऐसी कोई बत्ती नहीं लगी थी, जिससे डीटीओ के इस कृत्य पर लगातार सवाल उठ रहे थे और यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया था।
