‘दम है तो PM मोदी और अमित शाह मुझसे डिबेट करें’, जंतर-मंतर से चंद्रशेखर आजाद की खुली चुनौती- VIDEO
Chandrashekhar Azad Ravan: जंतर-मंतर पर भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं को सीधी चुनौती दी है।
- Written By: मनोज आर्या
Chandrashekhar Azad Ravan On UGC: जंतर-मंतर पर भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं को सीधी चुनौती दी है। चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया है कि वह टीवी चैनलों की सामान्य डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वहां चर्चा का स्तर गिर चुका है और उन्हें अपने स्वाभिमान की चिंता है। उन्होंने खुली ललकार देते हुए कहा कि संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली हर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं, उनके साथ यूजीसी, दलितों, पिछड़ों, किसानों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर आमने-सामने बैठकर डिबेट करें। खुद को जमीन से जुड़ा नेता बताते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी नेता के बेटे या पोते नहीं हैं, बल्कि संघर्षों से तपकर यहां तक पहुंचे हैं और जमीनी हकीकत को बेहतर समझते हैं। चंद्रशेखर का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकता है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर संसद के दिग्गजों को बहस के लिए ललकारा है।
Chandrashekhar Azad Ravan On UGC: जंतर-मंतर पर भारी जनसैलाब को संबोधित करते हुए आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं को सीधी चुनौती दी है। चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया है कि वह टीवी चैनलों की सामान्य डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वहां चर्चा का स्तर गिर चुका है और उन्हें अपने स्वाभिमान की चिंता है। उन्होंने खुली ललकार देते हुए कहा कि संसद में प्रतिनिधित्व करने वाली हर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं, उनके साथ यूजीसी, दलितों, पिछड़ों, किसानों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर आमने-सामने बैठकर डिबेट करें। खुद को जमीन से जुड़ा नेता बताते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी नेता के बेटे या पोते नहीं हैं, बल्कि संघर्षों से तपकर यहां तक पहुंचे हैं और जमीनी हकीकत को बेहतर समझते हैं। चंद्रशेखर का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ला सकता है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर संसद के दिग्गजों को बहस के लिए ललकारा है।
