‘कांग्रेस ने संविधान की हत्या की…’, संसद में निशिकांत दुबे के बयान से मचा बवाल- VIDEO
Nishikant Dubey: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में बोलते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने आरक्षण खत्म करने की कोशिश की।
- Written By: मनोज आर्या
Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में बोलते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर हमला बोला है। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकते हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए इससे बार-बार विचलन किया गया। कॉन्सिट्यूएंट असेंबली में मुस्लिम लीग के सदस्य तजीमुल हसन ने मुसलमानों के लिए अलग लोकसभा-विधानसभा व आरक्षण की मांग की थी, जिसे सरदार पटेल ने खारिज कर दिया। बाद में कांग्रेस ने राजनीति के दबाव में कई निर्णय लिए—जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू रहने तक एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला। 2004 में आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को 4% आरक्षण देने का प्रयास हुआ, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया, लेकिन इसे आगे तेलंगाना और कर्नाटक में बढ़ाने की कोशिश जारी रही। 2011 में एएमयू और जामिया में एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण हटाया गया और 2012 में यूपीए सरकार ने 4.5% ओबीसी आरक्षण कम किया। वक्ता ने आरोप लगाया कि यह सब वोट बैंक राजनीति है और आरक्षण प्रणाली को बचाने के लिए जांच और सख़्त कार्रवाई जरूरी है।
Parliament Winter Session: संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में बोलते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर हमला बोला है। संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकते हैं, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए इससे बार-बार विचलन किया गया। कॉन्सिट्यूएंट असेंबली में मुस्लिम लीग के सदस्य तजीमुल हसन ने मुसलमानों के लिए अलग लोकसभा-विधानसभा व आरक्षण की मांग की थी, जिसे सरदार पटेल ने खारिज कर दिया। बाद में कांग्रेस ने राजनीति के दबाव में कई निर्णय लिए—जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 लागू रहने तक एससी, एसटी और ओबीसी को आरक्षण नहीं मिला। 2004 में आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को 4% आरक्षण देने का प्रयास हुआ, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया, लेकिन इसे आगे तेलंगाना और कर्नाटक में बढ़ाने की कोशिश जारी रही। 2011 में एएमयू और जामिया में एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण हटाया गया और 2012 में यूपीए सरकार ने 4.5% ओबीसी आरक्षण कम किया। वक्ता ने आरोप लगाया कि यह सब वोट बैंक राजनीति है और आरक्षण प्रणाली को बचाने के लिए जांच और सख़्त कार्रवाई जरूरी है।
