सोनीपत वीडियो कॉल अंतिम संस्कार में सबसे बड़ा मोड़! वृद्धाश्रम के संचालक ने खोला 5100 रुपये का असली राज- VIDEO
Sonipat Video Call Funeral: हरियाणा के सोनीपत में बुजुर्ग शिवचरण रतन गुप्ता के 'वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार' मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। वृद्धाश्रम के संचालक ने कई खुलासे किए हैं।
- Written By: मनोज आर्या
Sonipat Video Call Funeral Case: हरियाणा के सोनीपत में बुजुर्ग शिवचरण रतन गुप्ता के ‘वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार’ मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। नवभारत लाइव पर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वृद्धाश्रम के संचालक आनंद ने बताया कि इस मामले में बेटियों को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही आलोचनाएं पूरी तरह सही नहीं हैं। संचालक के अनुसार, मृतक की तीन बेटियां हैं जिनमें से बड़ी बेटी नेपाल में, दूसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में और तीसरी मुंबई में रहती है। घटना के वक्त तीन में से दो बेटियां गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं, जिसके कारण वे समय पर सोनीपत नहीं पहुंच सकीं। वहीं सबसे छोटी बेटी ने अकेले दूसरे राज्य से आने में असमर्थता और मानसिक उलझन के कारण वीडियो कॉल के जरिए पिता की अंतिम विदाई देखने का फैसला किया। संचालक ने 5100 रुपये ऑनलाइन भेजे जाने के विवाद पर भी स्थिति साफ करते हुए कहा कि छोटी बेटी ने यह राशि अंतिम संस्कार के खर्च के लिए भेजी थी, लेकिन स्थानीय समाजसेवियों और परिचितों ने उनके पहुंचने से पहले ही सारा प्रबंध कर दिया था। इस वजह से आश्रम प्रबंधन ने वह राशि बेटी को वापस लौटा दी है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शिवचरण अपनी मर्जी से आश्रम में रह रहे थे और उनकी बेटियां उन्हें लगातार अपने पास बुलाती थीं, लेकिन पुरानी रूढ़िवादी सोच के कारण वे बेटियों के घर जाकर रहने को तैयार नहीं थे। फिलहाल, आश्रम में बुजुर्ग की अस्थियों को सुरक्षित रखा गया है और बेटियों ने संदेश दिया है कि वे जल्द ही सोनीपत आकर अपने पिता की अस्थियों को खुद हरिद्वार ले जाकर विसर्जित करेंगी।
Sonipat Video Call Funeral Case: हरियाणा के सोनीपत में बुजुर्ग शिवचरण रतन गुप्ता के ‘वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार’ मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है। नवभारत लाइव पर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में वृद्धाश्रम के संचालक आनंद ने बताया कि इस मामले में बेटियों को लेकर सोशल मीडिया पर की जा रही आलोचनाएं पूरी तरह सही नहीं हैं। संचालक के अनुसार, मृतक की तीन बेटियां हैं जिनमें से बड़ी बेटी नेपाल में, दूसरी उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में और तीसरी मुंबई में रहती है। घटना के वक्त तीन में से दो बेटियां गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती थीं, जिसके कारण वे समय पर सोनीपत नहीं पहुंच सकीं। वहीं सबसे छोटी बेटी ने अकेले दूसरे राज्य से आने में असमर्थता और मानसिक उलझन के कारण वीडियो कॉल के जरिए पिता की अंतिम विदाई देखने का फैसला किया। संचालक ने 5100 रुपये ऑनलाइन भेजे जाने के विवाद पर भी स्थिति साफ करते हुए कहा कि छोटी बेटी ने यह राशि अंतिम संस्कार के खर्च के लिए भेजी थी, लेकिन स्थानीय समाजसेवियों और परिचितों ने उनके पहुंचने से पहले ही सारा प्रबंध कर दिया था। इस वजह से आश्रम प्रबंधन ने वह राशि बेटी को वापस लौटा दी है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि शिवचरण अपनी मर्जी से आश्रम में रह रहे थे और उनकी बेटियां उन्हें लगातार अपने पास बुलाती थीं, लेकिन पुरानी रूढ़िवादी सोच के कारण वे बेटियों के घर जाकर रहने को तैयार नहीं थे। फिलहाल, आश्रम में बुजुर्ग की अस्थियों को सुरक्षित रखा गया है और बेटियों ने संदेश दिया है कि वे जल्द ही सोनीपत आकर अपने पिता की अस्थियों को खुद हरिद्वार ले जाकर विसर्जित करेंगी।
