Ariha Shah Foster Care: कल्पना कीजिए उस मां की जिससे उसकी 7 महीने की बच्ची छीन ली गई। आज अरिहा 5 साल की होने वाली है, लेकिन वह अपनी मातृभाषा और संस्कृति से कट चुकी है। जानिए विदेशी कानून और कूटनीतिक दबाव के बीच फंसी इस नन्ही जान की पूरी कहानी।
यह कहानी बेबी अरिहा शाह की है, जिनके माता-पिता धरा शाह और भावेश शाह गुजरात के रहने वाले हैं। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश 2018 में अपनी पत्नी के साथ जर्मनी चले गए थे।, साल 2021 में बर्लिन में उनके घर अरिहा का जन्म हुआ। खुशियां तब मातम में बदल गईं जब सितंबर 2021 में महज 7 महीने की अरिहा को उसकी नानी के साथ खेलते समय गलती से चोट लग गई। जब मां ने बच्ची के डायपर में खून देखा, तो वे उसे तुरंत अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने चोट के आधार पर यौन प्रताड़ना का संदेह जताया और जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी ‘युगेडमट’ को सूचित कर दिया, जिसने अरिहा को अपनी कस्टडी में ले लिया।
जर्मन पुलिस की गहन जांच और डीएनए टेस्ट के बाद यह साबित हो गया कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था और 2022 की शुरुआत में माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद चाइल्ड लाइन सर्विस ने बच्ची को नहीं लौटाया। उन्होंने एक नया सिविल केस दायर करते हुए तर्क दिया कि माता-पिता ने बच्ची की देखभाल में लापरवाही बरती है। इस आधार पर कोर्ट ने धरा और भावेश के ‘पैरेंटिंग राइट्स’ खत्म कर दिए और अरिहा को एक जर्मन फोस्टर केयर होम में भेज दिया गया।
Ariha Shah Foster Care: कल्पना कीजिए उस मां की जिससे उसकी 7 महीने की बच्ची छीन ली गई। आज अरिहा 5 साल की होने वाली है, लेकिन वह अपनी मातृभाषा और संस्कृति से कट चुकी है। जानिए विदेशी कानून और कूटनीतिक दबाव के बीच फंसी इस नन्ही जान की पूरी कहानी।
यह कहानी बेबी अरिहा शाह की है, जिनके माता-पिता धरा शाह और भावेश शाह गुजरात के रहने वाले हैं। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर भावेश 2018 में अपनी पत्नी के साथ जर्मनी चले गए थे।, साल 2021 में बर्लिन में उनके घर अरिहा का जन्म हुआ। खुशियां तब मातम में बदल गईं जब सितंबर 2021 में महज 7 महीने की अरिहा को उसकी नानी के साथ खेलते समय गलती से चोट लग गई। जब मां ने बच्ची के डायपर में खून देखा, तो वे उसे तुरंत अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने चोट के आधार पर यौन प्रताड़ना का संदेह जताया और जर्मनी की चाइल्ड प्रोटेक्शन एजेंसी ‘युगेडमट’ को सूचित कर दिया, जिसने अरिहा को अपनी कस्टडी में ले लिया।
जर्मन पुलिस की गहन जांच और डीएनए टेस्ट के बाद यह साबित हो गया कि बच्ची के साथ कोई यौन शोषण नहीं हुआ था और 2022 की शुरुआत में माता-पिता के खिलाफ क्रिमिनल केस बंद कर दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद चाइल्ड लाइन सर्विस ने बच्ची को नहीं लौटाया। उन्होंने एक नया सिविल केस दायर करते हुए तर्क दिया कि माता-पिता ने बच्ची की देखभाल में लापरवाही बरती है। इस आधार पर कोर्ट ने धरा और भावेश के ‘पैरेंटिंग राइट्स’ खत्म कर दिए और अरिहा को एक जर्मन फोस्टर केयर होम में भेज दिया गया।