Himanta Biswa Sarma Bihu Gift: असम की हेमंत बिस्वा शर्मा सरकार ने चुनाव की घोषणा से ठीक पहले ‘अरुणोदय योजना’ के तहत प्रदेश की 40 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ₹3600 करोड़ की राशि हस्तांतरित की है। प्रत्येक लाभार्थी महिला को ₹9000 की आर्थिक मदद मिली है, जिसे मुख्यमंत्री ने ‘बिहू तोहफा’ करार दिया है। हालांकि, इस भारी-भरकम राशि के पीछे का गणित यह है कि इसमें दो महीने का बकाया, दो महीने की एडवांस राशि और ₹4000 का अतिरिक्त बिहू बोनस शामिल है। विपक्ष ने इस कदम को सीधे तौर पर ‘वोट खरीदने का फार्मूला’ बताते हुए निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चुनाव जीतने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अब भी बरकरार हैं। मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने सार्वजनिक मंचों से महिलाओं से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की है। दूसरी ओर, लाभार्थी महिलाओं में जहां इस आर्थिक मदद को लेकर खुशी है, वहीं कुछ का तर्क है कि सरकार एक हाथ से पैसे देती है और दूसरे हाथ से महंगे गैस सिलेंडर के जरिए उन्हें वापस ले लेती है। असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह योजना राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। अब देखना यह होगा कि क्या बिहार की तर्ज पर असम में भी महिला मतदाता एनडीए के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाती हैं या महंगाई का मुद्दा इस ‘कैश बेनिफिट’ योजना पर भारी पड़ेगा।
Himanta Biswa Sarma Bihu Gift: असम की हेमंत बिस्वा शर्मा सरकार ने चुनाव की घोषणा से ठीक पहले ‘अरुणोदय योजना’ के तहत प्रदेश की 40 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ₹3600 करोड़ की राशि हस्तांतरित की है। प्रत्येक लाभार्थी महिला को ₹9000 की आर्थिक मदद मिली है, जिसे मुख्यमंत्री ने ‘बिहू तोहफा’ करार दिया है। हालांकि, इस भारी-भरकम राशि के पीछे का गणित यह है कि इसमें दो महीने का बकाया, दो महीने की एडवांस राशि और ₹4000 का अतिरिक्त बिहू बोनस शामिल है। विपक्ष ने इस कदम को सीधे तौर पर ‘वोट खरीदने का फार्मूला’ बताते हुए निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार चुनाव जीतने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दे अब भी बरकरार हैं। मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने सार्वजनिक मंचों से महिलाओं से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की है। दूसरी ओर, लाभार्थी महिलाओं में जहां इस आर्थिक मदद को लेकर खुशी है, वहीं कुछ का तर्क है कि सरकार एक हाथ से पैसे देती है और दूसरे हाथ से महंगे गैस सिलेंडर के जरिए उन्हें वापस ले लेती है। असम में 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले यह योजना राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। अब देखना यह होगा कि क्या बिहार की तर्ज पर असम में भी महिला मतदाता एनडीए के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाती हैं या महंगाई का मुद्दा इस ‘कैश बेनिफिट’ योजना पर भारी पड़ेगा।