Asaduddin Owaisi: क्या 18 करोड़ मुसलमानों से नाइंसाफी कर बनेगा ‘विकसित भारत’? ओवैसी ने मोदी सरकार को ललकारा!
Owaisi On Uniform Civil Code: असदुद्दीन ओवैसी ने अपने हालिया भाषण में केंद्र सरकार की 'विकसित भारत' की अवधारणा और समान नागरिक संहिता (UCC) पर कड़ा प्रहार किया है।
- Written By: सजल रघुवंशी
Asaduddin Owaisi Speech: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने हालिया भाषण में केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत’ की अवधारणा और समान नागरिक संहिता (UCC) पर कड़ा प्रहार किया है। ओवैसी ने तर्क दिया कि 18 करोड़ मुसलमानों के अधिकारों के साथ नाइंसाफी करके देश को विकसित नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने भारत की तुलना एक ऐसे ‘चमन’ (बगीचे) से की, जिसकी खूबसूरती तभी बनी रहती है जब उसमें हर धर्म का फूल खिले। ओवैसी ने गुजरात और उत्तराखंड में लागू किए जा रहे कानूनों की आलोचना करते हुए कहा कि मुसलमानों पर उनकी शरीयत के बजाय दूसरे धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों को मुसल्लत करना संविधान की धारा 25 का उल्लंघन है। उन्होंने विरासत और तलाक के मुद्दों पर बोलते हुए दावा किया कि इस्लाम ही वह पहला धर्म है जिसने बेटियों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिया है। उन्होंने तीन तलाक और विरासत कानूनों में सरकारी हस्तक्षेप को धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया। इसके अलावा, उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर भी भाजपा और आरएसएस के बयानों को तथ्यहीन करार दिया। ओवैसी ने साफ किया कि एक समुदाय को बदनाम करने की राजनीति देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए हानिकारक है।
Asaduddin Owaisi Speech: एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने हालिया भाषण में केंद्र सरकार की ‘विकसित भारत’ की अवधारणा और समान नागरिक संहिता (UCC) पर कड़ा प्रहार किया है। ओवैसी ने तर्क दिया कि 18 करोड़ मुसलमानों के अधिकारों के साथ नाइंसाफी करके देश को विकसित नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने भारत की तुलना एक ऐसे ‘चमन’ (बगीचे) से की, जिसकी खूबसूरती तभी बनी रहती है जब उसमें हर धर्म का फूल खिले। ओवैसी ने गुजरात और उत्तराखंड में लागू किए जा रहे कानूनों की आलोचना करते हुए कहा कि मुसलमानों पर उनकी शरीयत के बजाय दूसरे धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों को मुसल्लत करना संविधान की धारा 25 का उल्लंघन है। उन्होंने विरासत और तलाक के मुद्दों पर बोलते हुए दावा किया कि इस्लाम ही वह पहला धर्म है जिसने बेटियों को पिता की संपत्ति में अधिकार दिया है। उन्होंने तीन तलाक और विरासत कानूनों में सरकारी हस्तक्षेप को धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया। इसके अलावा, उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर भी भाजपा और आरएसएस के बयानों को तथ्यहीन करार दिया। ओवैसी ने साफ किया कि एक समुदाय को बदनाम करने की राजनीति देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए हानिकारक है।
