Vijay Baras Navabharat Interview: नागपुर की संकरी गलियों में 25 साल पहले कई बच्चे ऐसे थे जिनके हाथों में किताबें नहीं थीं। उनकी दुनिया सिर्फ़ डर, नशे और अपराध से भरी थी। खेलकूद और पढ़ाई की उम्र में ये बच्चे गुमनाम रास्तों पर भटक रहे थे। लेकिन उनके जीवन में एक मोड़ तब आया जब विजय बारसे, एक शिक्षक और समाज सेवी, उनके बीच आए। उन्होंने देखा कि इन बच्चों में छुपी क्षमता को सही दिशा दी जा सकती है। विजय बारसे ने बच्चों की ज़िंदगी में बदलाव लाने के लिए फुटबॉल को माध्यम बनाया। खेल के जरिए उन्होंने न सिर्फ बच्चों का ध्यान पढ़ाई और अनुशासन की ओर मोड़ा, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और नई पहचान भी दी। उनके मार्गदर्शन में बच्चे नशे और अपराध से दूर होते गए और सकारात्मक दिशा में बढ़ने लगे। आज वही बच्चे, जिनकी दुनिया कभी अंधेरे में थी, विजय बारसे की मेहनत और फुटबॉल की वजह से अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।
Vijay Baras Navabharat Interview: नागपुर की संकरी गलियों में 25 साल पहले कई बच्चे ऐसे थे जिनके हाथों में किताबें नहीं थीं। उनकी दुनिया सिर्फ़ डर, नशे और अपराध से भरी थी। खेलकूद और पढ़ाई की उम्र में ये बच्चे गुमनाम रास्तों पर भटक रहे थे। लेकिन उनके जीवन में एक मोड़ तब आया जब विजय बारसे, एक शिक्षक और समाज सेवी, उनके बीच आए। उन्होंने देखा कि इन बच्चों में छुपी क्षमता को सही दिशा दी जा सकती है। विजय बारसे ने बच्चों की ज़िंदगी में बदलाव लाने के लिए फुटबॉल को माध्यम बनाया। खेल के जरिए उन्होंने न सिर्फ बच्चों का ध्यान पढ़ाई और अनुशासन की ओर मोड़ा, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और नई पहचान भी दी। उनके मार्गदर्शन में बच्चे नशे और अपराध से दूर होते गए और सकारात्मक दिशा में बढ़ने लगे। आज वही बच्चे, जिनकी दुनिया कभी अंधेरे में थी, विजय बारसे की मेहनत और फुटबॉल की वजह से अपनी पहचान बनाने में सफल हुए।