Bengal Election: अमित शाह का ‘मिशन 148’, बंगाल फतह के लिए चाणक्य ने तैयार किया अभेद्य ब्लूप्रिंट; जानें सबकुछ
Amit Shah: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह ने मिशन 148 का एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया है। भाजपा पिछले चुनाव के अनुभव से बूथ स्तर पर काम कर रही है।
- Written By: मनोज आर्या
Amit Shah Strategy For Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह ने ‘मिशन 148’ का एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया है। 2021 के चुनावों से सबक लेते हुए, इस बार भाजपा का ध्यान केवल रैलियों और नारों पर नहीं, बल्कि ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ और बूथ स्तर के नेटवर्क पर है। रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन 40 सीटों पर फोकस करना है, जिन्हें भाजपा ने पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से खो दिया था। आंतरिक सर्वे में भाजपा को 100 सीटों पर बढ़त मिलने की उम्मीद जताई गई है, जिसे अब बहुमत के आंकड़े (148) तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। अमित शाह खुद बंगाल में 15 दिनों तक प्रवास करेंगे, जहां वे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधे संवाद करेंगे। भाजपा का एक बड़ा लक्ष्य ‘भय नहीं, भरोसा’ का नैरेटिव बनाना है, ताकि मतदाताओं के मन से चुनाव बाद होने वाली हिंसा का डर निकाला जा सके। इसके लिए केंद्रीय बलों की 500 कंपनियों को चुनाव के बाद भी तैनात रखने की योजना है।
Amit Shah Strategy For Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह ने ‘मिशन 148’ का एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया है। 2021 के चुनावों से सबक लेते हुए, इस बार भाजपा का ध्यान केवल रैलियों और नारों पर नहीं, बल्कि ‘माइक्रो-मैनेजमेंट’ और बूथ स्तर के नेटवर्क पर है। रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन 40 सीटों पर फोकस करना है, जिन्हें भाजपा ने पिछले चुनाव में बहुत कम अंतर से खो दिया था। आंतरिक सर्वे में भाजपा को 100 सीटों पर बढ़त मिलने की उम्मीद जताई गई है, जिसे अब बहुमत के आंकड़े (148) तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। अमित शाह खुद बंगाल में 15 दिनों तक प्रवास करेंगे, जहां वे कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से सीधे संवाद करेंगे। भाजपा का एक बड़ा लक्ष्य ‘भय नहीं, भरोसा’ का नैरेटिव बनाना है, ताकि मतदाताओं के मन से चुनाव बाद होने वाली हिंसा का डर निकाला जा सके। इसके लिए केंद्रीय बलों की 500 कंपनियों को चुनाव के बाद भी तैनात रखने की योजना है।
