US-Venezuela War: वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स पर अमेरिका ने नारको टेररिज्म और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों को न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया है। अमेरिका ने हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद मादुरो दंपति की गिरफ्तारी की, जिसे राजनीतिक विश्लेषक अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा या हालिया राष्ट्राध्यक्ष को गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं भी जायज़ नहीं माना जाता। उनका मानना है कि अब कानून की जगह ताकत ने ले ली है और सिद्धांतों की जगह राजनीतिक पसंद-नापसंद ने। हालांकि, अमेरिका के लिए यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी वह कई देशों में सैन्य या परोक्ष हस्तक्षेप कर नेताओं को सत्ता से बेदखल करता रहा है। 1953 में ईरान, 1954 में ग्वाटेमाला, 1973 में चिली, 1989 में पनामा और 2003 में इराक—इन सभी मामलों में अमेरिकी दखल के उदाहरण सामने आते हैं। हाल के वर्षों में हुंडूरास के पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी भी इसी कड़ी में जोड़ी जाती है।
US-Venezuela War: वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स पर अमेरिका ने नारको टेररिज्म और ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों को न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की फेडरल कोर्ट में पेश किया गया है। अमेरिका ने हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद मादुरो दंपति की गिरफ्तारी की, जिसे राजनीतिक विश्लेषक अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बता रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी मौजूदा या हालिया राष्ट्राध्यक्ष को गिरफ्तार करना अंतरराष्ट्रीय कानून में कहीं भी जायज़ नहीं माना जाता। उनका मानना है कि अब कानून की जगह ताकत ने ले ली है और सिद्धांतों की जगह राजनीतिक पसंद-नापसंद ने। हालांकि, अमेरिका के लिए यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी वह कई देशों में सैन्य या परोक्ष हस्तक्षेप कर नेताओं को सत्ता से बेदखल करता रहा है। 1953 में ईरान, 1954 में ग्वाटेमाला, 1973 में चिली, 1989 में पनामा और 2003 में इराक—इन सभी मामलों में अमेरिकी दखल के उदाहरण सामने आते हैं। हाल के वर्षों में हुंडूरास के पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी भी इसी कड़ी में जोड़ी जाती है।