₹65 हजार की सैलरी में अमेरिका में 74 लाख की पढ़ाई! अभिजीत दीपके के पिता की संपत्ति पर उठे बड़े सवाल- VIDEO
CJP Fund Investigation Complaint: CJP के अभिजीत दीपके के पिता की संपत्ति की जांच के लिए एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने RTI फाइल की है। उन्होंने अमेरिका में पढ़ाई के ₹1.5 करोड़ के फंड पर सवाल उठाए हैं।
- Written By: अमन मौर्या
Abhijeet Dipke Asset Controversy: गुजरात के सूरत से एक आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके पिता भगवान राव दीपके की संपत्ति की जांच के लिए शिकायत दर्ज कराई है। अमित तिवारी का आरोप है कि भगवान राव दीपके महाराष्ट्र सरकार के एमआईडीसी में पूर्व जूनियर इंजीनियर थे, जिनकी मासिक सैलरी लगभग ₹45,000 से ₹65,000 थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे अभिजीत को अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए भेजा, जहां की फीस 74 लाख रुपए सालाना है और पूरी पढ़ाई में डेढ़ करोड़ का खर्च है। उनका कहना है कि इतनी सैलरी में विदेश में पढ़ाई असंभव है।
उन्होंने सवाल उठाया कि परिवार द्वारा ₹60 लाख का एजुकेशन लोन लेने के बाद भी बाकी बचे पैसों का स्रोत क्या है, जो आय से अधिक संपत्ति का मामला प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ईसीआई (ECI) में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि सीजेपी रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी न होने के बावजूद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा सीजेपी के लिए घोषित 1 करोड़ रुपये के फंड दिया गया, जोकि
जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 का उल्लंघन कर है।
Abhijeet Dipke Asset Controversy: गुजरात के सूरत से एक आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके पिता भगवान राव दीपके की संपत्ति की जांच के लिए शिकायत दर्ज कराई है। अमित तिवारी का आरोप है कि भगवान राव दीपके महाराष्ट्र सरकार के एमआईडीसी में पूर्व जूनियर इंजीनियर थे, जिनकी मासिक सैलरी लगभग ₹45,000 से ₹65,000 थी। इसके बावजूद उन्होंने अपने बेटे अभिजीत को अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए भेजा, जहां की फीस 74 लाख रुपए सालाना है और पूरी पढ़ाई में डेढ़ करोड़ का खर्च है। उनका कहना है कि इतनी सैलरी में विदेश में पढ़ाई असंभव है।
उन्होंने सवाल उठाया कि परिवार द्वारा ₹60 लाख का एजुकेशन लोन लेने के बाद भी बाकी बचे पैसों का स्रोत क्या है, जो आय से अधिक संपत्ति का मामला प्रतीत होता है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने ईसीआई (ECI) में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया है कि सीजेपी रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी न होने के बावजूद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल द्वारा सीजेपी के लिए घोषित 1 करोड़ रुपये के फंड दिया गया, जोकि
जनप्रतिनिधि अधिनियम 1951 का उल्लंघन कर है।
