UAPA लगाने पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त! हल्द्वानी हिंसा मामले में आरोपी की जमानत बरकरार, धामी सरकार को लगाई फटकार
Haldwani Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा मामले के आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत बरकरार रखी। कोर्ट ने UAPA लगाने पर उत्तराखंड सरकार से सवाल उठाते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।
- Written By: अक्षय साहू
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)
2024 Haldwani Violence Case: सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के हल्द्वानी हिंसा मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की जमानत को बरकरार रखने का आदेश दिया है। आज शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल मलिक की जमानत को बरकरार रखा। कोर्ट के फैसले के बाद उत्तराखंड सरकार की याचिका भी खारिज हो गई है।
कोर्ट ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई भीड़ पुलिस स्टेशन को आग लगा देती है, तो केवल इस आधार पर UAPA कैसे लागू होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक व्यवस्था और UAPA अलग-अलग अवधारणाएं हैं। कोर्ट ने इस मामले में UAPA लगाने पर उत्तराखंड सरकार से तीखे सवाल किए।
हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इनकार
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने उत्तराखंड सरकार से पूछा कि केवल इसलिए UAPA कैसे लगाया जा सकता है कि भीड़ ने पुलिस थाना जला दिया। इसके साथ ही बेंच ने मलिक को जमानत देने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश में किसी भी प्रकार दखल देने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि भले ही हाई कोर्ट में दलीलें अधूरी रही हों, लेकिन इसके आधार पर हमें व्यक्ति के आजादी से जुड़े मामले में दखल देने कारण नहीं नजर आता है।
सम्बंधित ख़बरें
उमर अब्दुल्ला और पायल के तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी, 17 साल से अलग रह रहे थे दोनों लोग
MBBS-BDS Admission 2026: NEET EWS कोटे की 8 लाख आय सीमा पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें क्या हैं नियम
समय पर सुनवाई होती तो एकनाथ शिंदे नहीं बनते सीएम, शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल की दलील
न विधायक… न MLC, फिर भी मंत्री क्यों दीपक प्रकाश? सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा सवाल; क्या है नियम
गौरतलब है कि यह मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट के 16 अप्रैल, 2026 के उस आदेश से जुड़ा हुआ है, जिसमें हाई कोर्ट ने अब्दुल मलिक को जमानत दी थी। मलिक के खिलाफ 8 फरवरी, 2024 को हल्द्वानी में हुई बनभूलपुरा हिंसा के सिलसिले में भारतीय दंड संहिता (IPC), UAPA, आर्म्स एक्ट और अन्य दंडात्मक कानूनों की कई धाराओं के तहत आरोप थे। हाई कोर्ट ने मलिक को जमानत देते हुए कहा था कि जांच में सामने आया है कि हिंसा के मलिक मौके पर मौजूद ही नहीं था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इससे पहले उनके बेटे अब्दुल मोईद समेत एक सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
यह भी पढ़ें- 2 दिन के ब्रेक के बाद उत्तराखंड में चारधाम यात्रा फिर शुरू, सुबह 6 बजे से श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी
उत्तराखंड सरकार ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया उत्तराखंड राज्य की ओर से पेश हुए और कोर्ट में दलील रखी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने बिना ठोस वजह बताए जमानत दे दी, जबकि मलिक हिंसा का मुख्य साजशकर्ता था। घटनास्थल पर उसकी शारीरिक मौजूदगी न होना कोई मायने नहीं रखता था। भाटिया ने कोर्ट में कहा कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत कड़ी शर्तों पर विचार नहीं किया गया।
