

Kailash Mansarovar Yatra 2026: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चंपावत के टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को रवाना किया। जिससे लिपुलेख मार्ग से होने वाली सालाना तीर्थयात्रा की शुरुआत हुई है। इतना ही नही बल्कि 49 तीर्थयात्री लिपुलेख गुंजी की ओर अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर निकले चुकें है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पारंपरिक तरीके से तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और इसी के साथ उनकी सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
सभा को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने उत्तराखंड के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि के रूप में जाना जाता है। इसे भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है और यहां आने वाला हर श्रद्धालु एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है।
उन्होंने यह भी कहा है, कि राज्य देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं की मेजबानी करने को सम्मान की बात मानता है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि तीर्थयात्रियों को इस पवित्र यात्रा के दौरान यादगार और आरामदायक अनुभव मिले।
आपको बता दें, कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले वाले जत्थे में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, बिहार और देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 49 श्रद्धालु शामिल हैं। इतना ही नही, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीर्थयात्रियों के इस पहले जत्थे से मुलाकात की, उन्हें भगवान शिव की पट्टिका और रुद्राक्ष की माला भेंटकर सम्मानित किया और उनकी यात्रा सुरक्षित और सुखद होने की शुभकामनाएं दीं।
मीडिया से बात करते हुए सीएम धामी ने कहा है कि हम यहां से भगवान महादेव के 49 श्रद्धालुओं को इस यात्रा पर भेज रहे हैं। यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है। उन्होंने यह भी बताया कि हमें भगवान शिव को याद करने का अवसर भी मिलता है।
हर साल हम इस यात्रा को रवाना करते हैं। हमारी कोशिश है कि इस यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम, सरल और सुरक्षित हो। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने तीर्थयात्रियों के स्वागत, ठहरने और अन्य सुविधाओं के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
तीर्थयात्रियों में शामिल गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण, जो पहले जत्थे के सबसे युवा सदस्य हैं, ने आईएएनएस से बात करते हुए अपना उत्साह साझा किया। उन्होंने कहा है, कि मैं गुजरात से हूं और अपनी मां के साथ यहां आया हूं। यहां आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। सब लोग एक परिवार जैसे लग रहे हैं। हर किसी का सपना होता है कि वे यह तीर्थयात्रा करें, और कैलाश मानसरोवर यात्रा के ज़रिए यह सपना पूरा हो रहा है।
राजस्थान के जयपुर से आईं तीर्थयात्री कंचन ने भी मीडिया से बात करते हुए अपनी खुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने पहले ही 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी कर ली है। बस यही एक तीर्थयात्रा यानी कैलाश मानसरोवर यात्रा ही बाकी थी और अब मैं यहां हूं। इससे ज़्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है।
मीडिया के साथ बात करने पर बेंगलुरु की रीना सुमन, जो अपने परिवार के साथ यह तीर्थयात्रा कर रही हैं उन्होंने कहा था, कि मैंने साल 2025 में चार धाम यात्रा की थी और अब मैं अपने परिवार के साथ यहां हूं। मुझे यही उम्मीद है कि भगवान शिव की कृपा से सभी के लिए यह यात्रा सुगम और सुरक्षित रहेगी।