4000 पेड़ों की कटाई... ऋषिकेश में जनता का फूटा गुस्सा, CM धामी ने 'सात मोड़' प्रोजेक्ट पर लिया ये बड़ा फैसला

Rishikesh People Protest: उत्तराखंड के ऋषिकेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता और पर्यावरणविदों के विरोध के बाद देहरादून के 'सात मोड़' वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी।
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पुष्कर सिंह धामी का सात मोड प्रोजेक्ट पर फैसला (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Pushkar Singh Dhami Saat Mod Dehradun Project: उत्तराखंड में भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के तहत सड़कों पर काटे जा रहे पेड़ों की कटाई को लेकर जनता का विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया। हजारों की संख्या में उत्तराखंड की जनता ने सरकार के इस प्रोजेक्ट का विरोध किया। जनता ने प्रोजेक्ट की दौरान हजारों पेड़ों की कटाई को लेकर आवाज उठाई, जिसके बाद उत्तराखंड सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को घोषणा की कि भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए देहरादून के 'सात मोड़' वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई रोक दी गई है। उन्होंने कहा कि जब तक सभी संबंधित पक्षों के साथ सहमति नहीं बन जाती, तब तक कोई काम नहीं होगा। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्थानीय लोगों की भावनाओं, पर्यावरण और इससे जुड़े लोगों की चिंताओं पर ध्यान देने का निर्देश दिया और कहा कि सरकार बातचीत और जनहित के आधार पर आगे बढ़ेगी।

प्रोजेक्ट के विरोध में 'ब्लैक हरेला' मनाया

यह कदम तब उठाया गया जब पर्यावरणविद् और स्थानीय लोग सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के लिए 4,000 से ज्यादा पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन कई दिनों तक चलने के कारण लोगों और पर्यावरणविदों ने उत्तराखंड के सालाना 'हरेला' त्योहार (जो पेड़ों और प्रकृति का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है) को मनाने के बजाय, गुरुवार को इस विस्तार प्रोजेक्ट के विरोध में 'ब्लैक हरेला' मनाया।

भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट

मुख्यमंत्री धामी ने 'एक्स' पर कहा, "मैंने देहरादून-ऋषिकेश फोर/सिक्स-लेन प्रोजेक्ट के बारे में हाल के दिनों में कई नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय निवासियों द्वारा जताई गई चिंताओं और सुझावों पर गंभीरता से ध्यान दिया है।"

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उन्होंने कहा कि भानियावाला-ऋषिकेश हाईवे चौड़ीकरण प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) की एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पहल है, जिस पर हाईकोर्ट के निर्देशों के साथ-साथ सभी जरूरी कानूनी और पर्यावरणीय मंजूरी और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए काम किया जा रहा था।

इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव में कमी

मुख्यमंत्री ने कहा, "वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट में लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास और छोटे वन्यजीवों की आवाजाही के लिए विशेष पुलिया जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव और सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मौत की घटनाओं को कम करने में मदद मिलेगी, जो अक्सर इस रास्ते पर देखी जाती हैं।"

एनएचएआई का कहना है कि प्रोजेक्ट को 'विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए बचाव उपायों के अनुसार पूरा किया जा रहा है, खासकर इस रास्ते पर मौजूद हाथी कॉरिडोर को ध्यान में रखते हुए।' लगभग 20 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट 743 करोड़ रुपए की लागत से हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) के तहत बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, और उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया।

पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को दिए निर्देश

उन्होंने कहा, "विकास हमारे लिए जरूरी है, लेकिन लोगों की भावनाओं, पर्यावरण और स्थानीय हितों को नजरअंदाज करके कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। इसी मकसद को ध्यान में रखते हुए मैंने मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित लोगों, स्थानीय नागरिकों, जन प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ एक बार फिर विस्तार से बातचीत करें।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे की कार्रवाई उच्च न्यायालय के निर्देशों और फैसलों का पूरा सम्मान करते हुए की जाएगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट के तहत पेड़ों की कटाई तब तक रुकी रहेगी जब तक सभी पक्षों के बीच सहमति और भरोसे का संतोषजनक माहौल नहीं बन जाता।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "मेरे लिए उत्तराखंड की प्रकृति, लोगों की भावनाएं और राज्य का विकास, ये तीनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। हमारी सरकार बातचीत, सहमति और व्यापक जनहित के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।"

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