योगी ने दिल्ली में जुटाए जापानी निवेशक, आम चुनाव 2029 को लेकर दिया बड़ा सियासी संदेश

UP-Japan Investment Meet: जापानी निवेशकों के यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट में जुटने से योगी आदित्यनाथ की निवेश क्षमता चर्चा में है। ग्रेटर नोएडा और वाराणसी निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं।
UP-Japan Investment Meet
यूपी-जापान निवेश बैठक(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Yogi Adityanath Japan Investment Meet: दिल्ली के ताज पैलेस होटल में जापान के 200 से अधिक निवेशक यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट के लिए जुटे हैं। यह पांच दिवसीय कार्यक्रम है। जो दिल्ली के बाद लखनऊ, आगरा, ग्रेटर नोएडा, वाराणसी में भी आयोजित होगा। जबकि इसका मेगा समापन कार्यक्रम 21 अगस्त को लखनउ में  यूपी-जापान इंवेस्टमेंट मीट के तहत होगा। 

जापानी प्रतिनिधिमंडल 22 अगस्त को काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए भी जाएगा। जहां उनको बदले हुए बनारस को लेकर भी जानकारी दी जाएगी। यामानाशी प्रीफेक्चर के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में भारत आए 200 से ज्यादा जापानी सीईओ और कारोबारी नेताओं के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों ने नवभारत से बातचीत में कहा कि योगी भारत को एक दिशा दे सकते हैं। उनके अंदर वही क्षमता, संभावना है। जो पीएम नरेंद्र मोदी के अंदर है। इन निवेशकों ने कहा कि वे ग्रेटर नोएडा और वाराणसी में निवेश के लिए बेहतर मानते हैं।

योगी ने यूपी की सियासत में बढ़ाई अपनी दावेदारी 

यह माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में जापानी निवेशकों को जुटाया है। उससे उन्होंने उत्तर प्रदेश को यह संदेश दे दिया है कि वह केवल कानून-व्यवस्था और बुलडोजर के मोर्चे पर ही नहीं बल्कि निवेश के मोर्चे पर भी महाराज का स्थान रखते हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने एक साथ इतने निवेशकों का एक मंच पर लाकर यह भी साबित किया कि उनके अंदर व्यापार, कारोबार, निवेश बढ़ाने की क्षमता और दक्षता भी है। अगर उनको बड़े अवसर मिले तो वह इससे भी बेहतर कर सकते हैं।

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योगी ने दिखाया यूपी मॉडल का नया चेहरा 

योगी आदित्यनाथ के इन्वेस्टमेंट मीट को लेकर दिल्ली से उत्तर प्रदेश तक चर्चा है कि इसकी टाइमिंग के क्या मायने हैं। इस कार्यक्रम में आए एक नेता ने कहा कि योगी आदित्यनाथ फिलहाल  राज्य में ही है और वहीं रहेंगे। उनकी इच्छा दिल्ली दरबार की नहीं है। अगर वह यूपी से हटते हैं तो वहां की कानून व्यवस्था की स्थिति ध्वस्त हो सकती है। जिससे प्रदेशको नुकसान होगा। ये निवेशक भी इस वजह से आए हैं कि यूपी में योगी राज है। इसको लेकर फिलहाल बड़े राजनीतिक मायने निकालना जल्दबाजी होगी। 

-नवभारत के लिए दिल्ली से संतोष ठाकुर की रिपोर्ट

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