

Highlights:
रामपाल को दी शास्त्रार्थ की खुली चुनौती
शिवांश नारायण हुए नियुक्त प्रतिनिधि
‘रामपाल का रसातल गमन’ ग्रन्थ का हुई विमोचन
Rampal Book Controversy Varanasi News: सनातन धर्म, वेद-शास्त्रों और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर संत रामपाल द्वारा की गए आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर वाराणसी के श्रीविद्यामठ, केदारघाट में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने रामपाल की शास्त्रार्थ चुनौती को स्वीकार किए जाने को लेकर जानकारी दी गई। इस दौरान शंकराचार्य शिवांश नारायण द्विवेदी को शास्त्रीय खंडन के लिए प्रतिनिधि नियुक्त करने की घोषणा की।
मां भगवती का अपमान करने वाले रामपाल द्वारा दी गई शास्त्रार्थ की चुनौती को स्वीकार करते हुए शंकराचार्य महाराज ने शिवांश नारायण द्विवेदी को रामपाल के समक्ष सनातन धर्म का पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया।
इस अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने रामपाल के वैचारिक प्रतिकार के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा रचित ग्रंथ ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन भी किया।
बता दें कि प्रेस वार्ता के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ जैसी पुस्तकों में हिंदू देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं और धर्मशास्त्रों को लेकर की गई टिप्पणियों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वेद, पुराण और अन्य धर्मशास्त्रों के प्रमाणों को संदर्भ से अलग प्रस्तुत करके लोगों में भ्रम पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में हिंदू पर्वों, धार्मिक प्रतीकों और वैदिक विवाह संस्कार से जुड़े विचारों पर भी चर्चा हुई, महाराज ने संबंधित दावों का शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर जवाब देने की बात कही।
बता दें कि आयोजकों ने 18 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित विज्ञप्ति का भी उल्लेख किया। इसमें रामपाल की पुस्तकों के प्रकाशन, मुद्रण, वितरण और मुद्रक के पते से जुड़े सवालों के साथ राजधानी लखनऊ में हुई कानूनी कार्रवाई, प्राथमिकी और न्यायालय में दी गई याचिकाओं से संबंधित घटनाक्रम को भी शामिल किया गया है।
इस दौरान शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित ‘रामपाल का रसातल गमन’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस ग्रंथ में सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर लगाए गए अलग-अलग आक्षेपों का शास्त्रीय आधार पर शिवांश द्वारा निराकरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
पुस्तक में प्रामाणिक आचार्यों के विचारों व शास्त्रीय प्रमाणों के माध्यम से संबंधित विषयों की समीक्षा भी की गई है।
बता दें कि प्रेस वार्ता में रामपाल को किसी तटस्थ स्थान पर आकर आमने-सामने शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी गई है। आयोजकों का कहना है कि सनातन धर्म के संबंध में उठाए गए सवालों का उत्तर शास्त्र, प्रमाण और तर्क के आधार पर ही दिया जाना चाहिए।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने सवाल उठाते हुए प्रश्न किया कि यदि अपने कथित ज्ञान और शास्त्रीय प्रमाणों पर इतना ही विश्वास है, तो किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ करने के लिए क्यों नहीं आते? उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म के संबंध में किए गए आक्षेपों का उत्तर शास्त्र, प्रमाण और युक्ति के आधार पर दिया जाएगा।
उन्होंने सभी जागरूक सनातनियों, धर्माचार्यों, विद्वानों और पत्रकार बन्धुओं से अनुरोध किया कि इस पूरी प्रेस वार्ता को सुनें और इसमें उठाए गए प्रश्नों और शास्त्रीय विषयों को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाएं।