UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की सियासत में बयानों का दौर तेज हो गया है। बीजेपी के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह के समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को लेकर दिए बयान पर अब अखिलेश ने प्रतिक्रिया दी है। बृज भूषण के ‘अखिलेश के बिना सब सूना है’ वाले बयान पर सपा प्रमुख ने कहा, “जो आना चाहेगा, उसको लेंगे, उसे स्वीकार करेंगे।”
बृज भूषण शरण सिंह से यूपी में सपा-कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सवाल पूछा गया था। इसी दौरान उन्होंने अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा था कि ‘अखिलेश के बिना सब सूना है।’ उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा और कांग्रेस के बीच 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत जारी है।
बृज भूषण के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि जो भी उनकी पार्टी में आना चाहेगा, उसे स्वीकार किया जाएगा। हालांकि, अखिलेश के इस बयान में उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेकर पार्टी में शामिल होने की बात नहीं की है।
इसी बीच उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। सपा की ओर से राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी के नाम सामने आ चुके हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावना पर भी विचार कर रही है।
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि मतदान 16 अक्टूबर को होगा। यूपी में कुल 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें नौ सीटें मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होने के कारण खाली हो रही हैं, जबकि एक सीट दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद रिक्त है।
यूपी विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन अधिकतम आठ सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि सपा को कांग्रेस के समर्थन के साथ दो सीटें मिलने का गणित बताया जा रहा है। हालांकि, उम्मीदवारों की अंतिम स्थिति और चुनाव में विधायकों के वोट के आधार पर तस्वीर बदल सकती है।
यही वजह है कि सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। पिछली बार 2024 में बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवार और सपा के दो उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचे थे, जबकि सपा का तीसरा उम्मीदवार चुनाव हार गया था।
राज्यसभा चुनाव के साथ ही यूपी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां भी तेज हो रही हैं। सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत के बीच बृज भूषण शरण सिंह का अखिलेश यादव पर बयान और उसके बाद अखिलेश की प्रतिक्रिया ने राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है।