बंगाल चुनाव के बाद UP में होगा बड़ा फेरबदल! योगी की टीम में नए नेताओं की एंट्री, कई मंत्रियों का कटेगा पत्ता
UP Politics: उत्तर प्रदेश में बंगाल चुनाव के बाद योगी कैबिनेट का विस्तार संभव है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए नए चेहरों, विशेषकर ब्राह्मण और दलित नेताओं को शामिल किए जाने की उम्मीद है।
- Written By: अर्पित शुक्ला
CM योगी, पंकज चौधरी (Image- Social Media)
UP Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर काफी समय से अटकलें चल रही हैं। पहले कहा जा रहा था कि खरमास खत्म होने के बाद कभी भी विस्तार हो सकता है, लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि बंगाल चुनाव के बाद यह फेरबदल संभव है। इस बदलाव में कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है, जबकि कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। साथ ही विभागों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा संगठन को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में कुछ अनुभवी नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि मंत्रिमंडल में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास जोर रहेगा।
बंगाल चुनाव के बाद होगा फैसला
लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हाल के दिनों में लगातार बैठकों का दौर चला है। विनोद तावड़े ने लखनऊ पहुंचकर कई नेताओं से मुलाकात की, वहीं राज्य के दोनों डिप्टी सीएम भी दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मिल चुके हैं। इस बीच नरेंद्र मोदी, अमित शाह और संघ से जुड़े अरुण कुमार सहित कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन जारी है। माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव के बाद कैबिनेट विस्तार पर अंतिम फैसला हो जाएगा।
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ब्राह्मणों को साधने की तैयारी
प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर भी स्थिति साफ हो चुकी है और पंकज चौधरी को यह जिम्मेदारी मिल चुकी है, जिसके बाद अब कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज हो गई है। चर्चा है कि इस विस्तार में किसी वरिष्ठ ब्राह्मण नेता को अहम जगह दी जा सकती है। फिलहाल ब्रजेश पाठक के अलावा ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जितिन प्रसाद प्रमुख थे, लेकिन उनके दिल्ली की राजनीति में जाने के बाद एक नया चेहरा सामने आ सकता है।
अखिलेश के PDA की काट
इसके साथ ही दलित समुदाय से भी किसी नेता को मंत्री बनाया जा सकता है। अखिलेश यादव द्वारा पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का मुद्दा उठाए जाने के बीच भाजपा इस वर्ग में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। यही वजह है कि दलित और महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है। महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक बहस के बीच किसी महिला नेता को मंत्री बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
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भूपेंद्र चौधरी का नाम तय
ओबीसी वर्ग से भूपेंद्र चौधरी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। जाट समुदाय से आने वाले भूपेंद्र चौधरी को मौका देकर पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना संदेश मजबूत करना चाहती है। दरअसल, अब तक मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और दोनों डिप्टी सीएम में से कोई भी पश्चिमी यूपी से नहीं है, ऐसे में कैबिनेट विस्तार के जरिए इस क्षेत्रीय संतुलन को साधने की रणनीति बन रही है।
