रथ पर सवार होकर स्नान...अविमुक्तेश्वरानंद पर भड़के रामभद्राचार्य, बोले- शास्त्र विरोधियों को मोक्ष नहीं मिलता

Avimukteshwaranand controversy: रामभद्राचार्य ने अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को रथ पर बैठकर स्नान के लिए नहीं जाना चाहिए था।
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रामभद्राचार्य व अविमुक्तेश्वरानंद (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Rambhadracharya on Avimukteshwaranand: जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और सरकार को प्रयागराज में संगम में पवित्र स्नान के लिए उनके दौरे के दौरान हुए विवाद से निपटना चाहिए। हालांकि, शंकराचार्य को रथ पर बैठकर स्नान के लिए नहीं जाना चाहिए था। वह खुद स्नान के लिए रथ पर सवार होकर शास्त्रों के खिलाफ जा रहे थे।

रामभद्राचार्य ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को रथ पर सवार होकर स्नान के लिए नहीं जाना चाहिए था। रामभद्राचार्य ने शंकराचार्य के इस काम को धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के विरुद्ध बताया।

शंकराचार्य ने किया शास्त्र विरुद्ध काम

चित्रकूट की तुलसीपीठ के प्रमुख ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे खुद पैदल चलकर स्नान के लिए जाते हैं। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि जो लोग शास्त्रों के खिलाफ काम करते हैं, उन्हें सुख, शांति या मोक्ष नहीं मिलेगा। इसलिए शास्त्रों के खिलाफ काम नहीं करना चाहिए।

मणिकर्णिका मामले पर कही बड़ी बात

काशी के मणिकर्णिका घाट पर मूर्तियों के तोड़े जाने की घटना के बारे में उन्होंने कहा कि स्थापित मूर्तियों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए, लेकिन यह संभव है कि जनता की सुविधा के लिए क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा हो। उन्होंने इस मामले में जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि वहां कोई भी प्रामाणिक मूर्ति नहीं तोड़ी गई है।

धीरेंद्र शास्त्री-रामभद्राचार्य की मुलाकात

बागेश्वर धाम के प्रमुख आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सोमवार देर शाम धार्मिक नगरी चित्रकूट में तुलसीपीठ पहुंचे। यहां उन्होंने अपने गुरु जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद लिया। चित्रकूट में धीरेंद्र शास्त्री के आने पर तुलसीपीठ में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। हालांकि, कुछ देर रुकने के बाद वह बांदा के लिए रवाना हो गए।

आखिर क्या है शंकराचार्य स्नान विवाद?

मौनी अमावस्या के दिन जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पहियों वाली पालकी में बैठकर संगम में स्नान के लिए जा रहे थे तो पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। इससे नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद बिना स्नान किए ही लौट गए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके एक दर्जन से अधिक शिष्यों को पुलिस अधिकारियों ने बुरी तरह पीटा।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें संगम तट से हटा दिया और कहा कि वे वहीं रहें जहां उन्हें छोड़ा गया है और उनके कैंप में प्रवेश न करें। इसके जवाब में डिविज़नल कमिश्नर सौम्या अग्रवाल और पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नहाने से नहीं रोका गया, बल्कि उन्हें पहियों वाली पालकी में नहाने जाने से रोका गया था और उनसे पैदल जाने का अनुरोध किया गया था।

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने भेजा नोटिस

मौनी अमावस्या पर संगम में पहियों वाली पालकी में पवित्र स्नान के लिए जाने से रोके जाने के बाद उठे विवाद के बीच प्रयागराज मेला अथॉरिटी ने  अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को नोटिस जारी किया है। नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया गया है और उनसे 24 घंटे के अंदर यह बताने को कहा गया है कि वह अपने नाम के आगे "शंकराचार्य" की उपाधि का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं और खुद को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित कर रहे हैं।

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