राम मंदिर चढावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं की बंद, याचिकाकर्ता अब ट्रायल कोर्ट में कर सकेंगे मदद

Ram Mandir Chadhave Chori: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दायर याचिकाओं को बंद कर दिया है। जांच की मांग के लिए याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट में मदद कर सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्टSource- IANS
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Highlights:

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बंद की दायर याचिका

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले का SIT कर रहा है जांच

  • जून के प्रथम सप्ताह में संज्ञान में आया था चढ़ावा चोरी का मामला

Supreme Court Closes The Petitions At Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की रकम में हेराफेरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दायर याचिकाओं को बंद कर दिया। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने बताया गया कि पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं को ट्रायल कोर्ट में मदद करने की अनुमति दे दी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि यह सिर्फ आरोपियों और सरकार के बीच का मामला नहीं है, बल्कि इससे जनहित भी जुड़ा है।

कोर्ट ने कहा कि जिस तरह कानून अपराध के पीड़ितों को अदालत की मदद करने का अधिकार देता है, उसी तरह इस मामले के याचिकाकर्ता भी ट्रायल कोर्ट में अपनी बात रख सकेंगे। अदालत ने निचली अदालत को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

CBI जांच की मांग की गई थी

इस मामले में कई याचिकाएं दाखिल कर राम मंदिर के लिए मिले दान के पैसे की कथित हेराफेरी की CBI जांच कराने की मांग की गई थी।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों की SIT (विशेष जांच टीम) को अपनी जांच जारी रखने की अनुमति दी है। इस टीम में एक फोरेंसिक ऑडिटर भी शामिल है।

जांच के दौरान SIT को आठ आरोपियों से जुड़े 105 ऐसे मामले मिले हैं, जिनमें बिना अनुमति के नकदी निकाली गई या संदिग्ध तरीके से पैसे जमा किए गए।

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संपत्ति खरीदने में भी इस्तेमाल हुआ पैसा

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने कथित तौर पर इस पैसे को बैंक खातों में जमा किया या अलग-अलग जगह निवेश किया।

उन्होंने बताया कि पुराने रिकॉर्ड की जांच में कुछ लोगों के संपत्ति खरीदने की जानकारी मिली है। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक संपत्ति की रजिस्ट्री में उसकी कीमत 15 लाख रुपये दिखाई गई, जबकि उसकी वास्तविक कीमत करीब 50 लाख रुपये थी।

मेहता के मुताबिक, इससे आशंका है कि बाकी रकम नकद में दी गई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों के पास कमाई का कोई दूसरा स्रोत नहीं था, इसलिए यह शक है कि नकद रकम मंदिर फंड से आई थी।

अब इस मामले में आगे की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में होगी। याचिकाकर्ता भी वहां जांच और सुनवाई में अदालत की मदद कर सकेंगे।

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जून में संज्ञान में आया था मामला

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला 6 जून को सुर्खियों मे तब आया था जब मंदिर के ही एक सदस्य ने चढ़ावा की रकम में अनियमितता का आरोप लगाकर जांच की मांग की थी। मामला सपा नेता पवन पांडेय के पास पहुंचा। पवन ने मामले को सार्वजनिक किया। सपा प्रमुख ने मामले को लेकर X पर ट्वीट किया। देखते ही देखते मामला बहुत हाईलाइट हो गया।

मामला तूल पकड़ने के बाद दान की गणना और SBI के कर्मचारियों समेत 8 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।