

Rajasthan State Properties Prayagraj: राजस्थान स्टेट की प्रयागराज स्थित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। राजस्व परिषद की ओर से पत्र आने के बाद जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को इन संपत्तियों के संबंध में किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री या हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक संपत्तियों से जुड़े अभिलेखों की जांच पूरी नहीं हो जाती।
राजस्थान स्टेट की प्रयागराज शहर में करीब 1263 संपत्तियां बताई गई हैं। इन संपत्तियों को लेकर राजस्व परिषद की ओर से पत्र भेजे जाने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त अथवा हस्तांतरण से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया फिलहाल आगे न बढ़ाई जाए।
प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र के लेखपालों को राजस्थान स्टेट की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों के स्वामित्व, पूर्व में हुए हस्तांतरण और वर्तमान स्थिति की जांच की जाएगी।
सदर तहसील में अब पुराना रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। कर्मचारियों की ओर से सुबह से ही पुराने दस्तावेज निकाले जा रहे हैं। जमीन और खातौनी से जुड़े अभिलेखों को जुटाकर उनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित संपत्तियों का स्वामित्व किसके नाम रहा है और पूर्व में उनका हस्तांतरण किस प्रकार हुआ। साथ ही वर्तमान स्थिति का भी सत्यापन किया जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। तब तक संबंधित संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जिले में राजस्थान स्टेट की कई संपत्तियां हैं। इनमें से बड़े भू-भाग पर राजस्थान स्टेट की ओर से दावेदारी भी की गई है। इसके बाद राजस्व परिषद ने संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। कुछ संपत्तियों को लेकर पहले से विवाद और मुकदमे चलने की जानकारी भी सामने आई है।
ऐसे में प्रशासन ने अभिलेखों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए जांच शुरू कर दी है। लेखपाल संबंधित संपत्तियों की जानकारी और दस्तावेज जुटाने में लगे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अभिलेखों की जांच पूरी होने तक राजस्थान स्टेट से जुड़ी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर रोक जारी रहेगी। जांच के बाद ही संपत्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने और आगे की कार्रवाई तय होने की उम्मीद है।