

जिलाधिकारी के जवाब से संतुष्ट नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट
अपने हलफनामे को लेकर खेद व्यक्त कर रहे जिलाधिकारी
19 नवंबर 2026 को होगी मामले की अगली सुनवाई
Ghaziabad DM Allahabad High Court Stance: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ की ओर से दाखिल व्यक्तिगत हलफनामे और जांच रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि मामले में याची की शिकायत को दबाने का स्पष्ट प्रयास दिखाई दे रहा है। कोर्ट ने कहा कि वह जिलाधिकारी के जवाब से संतुष्ट नहीं है। इसके साथ ही शिकायत की नए सिरे से गहन जांच कर साक्ष्यों के मूल्यांकन के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का भी आदेश दिया गया है।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश बिजेंद्र कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताया कि शिकायत की जांच के लिए फरवरी 2026 में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति ने 17 फरवरी को अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हलफनामे के साथ दाखिल जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया तो पाया कि उस पर समिति के अध्यक्ष के हस्ताक्षर तो हैं, लेकिन अन्य दो सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं। इनमें क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, गाजियाबाद और थाना प्रभारी मुरादनगर शामिल थे। जिलाधिकारी ने अदालत में दलील दी कि अध्यक्ष के हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट को समिति की रिपोर्ट माना जाना चाहिए।
हलफनामे के मुताबिक, रिपोर्ट मिलने के बाद 25 फरवरी को उसे आवश्यक कार्रवाई के लिए क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी को भेजा गया था। कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया कि जब संबंधित अधिकारी स्वयं जांच समिति के सदस्य थे और रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर होने चाहिए थे, तो रिपोर्ट उन्हीं के पास कार्रवाई के लिए क्यों भेजी गई? अदालत ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया।
राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने बताया कि जिलाधिकारी अपने हलफनामे को लेकर खेद व्यक्त कर रहे हैं और अगली तारीख पर नया हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि समिति शिकायत की गहनता से जांच करे, आरोपों के समर्थन में उपलब्ध साक्ष्य जुटाए और उनका मूल्यांकन कर नई रिपोर्ट तैयार करे। रिपोर्ट अगली सुनवाई पर सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।
रविन्द्र कुमार मांदड़ प्रयागराज में भी जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वह 17 सितंबर 2024 को प्रयागराज के डीएम बने थे और जुलाई 2025 में उनका स्थानांतरण गाजियाबाद हो गया था। लगभग 11 महीने के कार्यकाल में उनके सामने महाकुम्भ-2025 के आयोजन की तैयारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की बड़ी जिम्मेदारी थी। महाकुम्भ की तैयारियों की नियमित समीक्षा, बाढ़ की स्थिति पर निगरानी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय उनकी प्रमुख प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल रहा।