मेरठवासियों के लिए आतंक बने आवारा कुत्ते, रोजाना जिला अस्पताल और मेडिकल में लग रही लंबी कतार

Meerut Stray Dogs Danger: मेरठ शहर में आवारा कुत्तों का आतंक किसी से छिपा नहीं है। नगर निगम के पास कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए बजट और केंद्र तो है, लेकिन अभियान कागजों में ही चल रहा है।
Stray dogs become menace
आवारा कुत्ते(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Highlights

  • एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने वालों की लंबी-चौड़ी कतार

  • नगर निगम की नसबंदी और टीकाकरण योजना फेल

  • कागजों में ही कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का अभियान

Meerut Stray Dogs Menace: मेरठ शहर में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। गली-मोहल्ले से लेकर मुख्य बाजारों तक झुंड में घूम रहे कुत्ते लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। हालात यह हैं कि, प्यारेलाल जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में रोजाना कुत्ता काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने वालों की लंबी-चौड़ी कतार लग रही है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार रोजाना 100 से 150 मरीज केवल कुत्ता काटने के बाद वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।

वहीं मेडिकल कॉलेज में भी वेक्सीन लगवाने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ता ही जा रहा है।इनमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है। सुबह टहलने निकलने वाले लोग और स्कूल जा रहे बच्चे सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। शास्त्री नगर, जागृति विहार, ब्रह्मपुरी, लिसाड़ी गेट, नौचंदी, सदर और कंकरखेड़ा इलाके से सबसे ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। लोगों का कहना है कि, कई बार शिकायत के बावजूद नगर निगम की टीम मौके पर नहीं पहुंचती।

कागज़ों में चल रहा अभियान

नगर निगम के पास कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए बजट और केंद्र तो है, लेकिन अभियान कागजों में ही चल रहा है। शहर में करीब 35 से 40 हजार आवारा कुत्तों के होने का अनुमान है, जबकि रोजाना नसबंदी का आंकड़ा 10 से 15 ही है। वहीं, स्थानीय पार्षदों का कहना है कि, नसबंदी केंद्र पर संसाधन कम हैं और पकड़ने वाली गाड़ी भी कम पड़ रही है। वहीं पशु प्रेमी संगठनों के विरोध के कारण भी कई बार टीम को वापिस लौटना पड़ता है।

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बच्चे और बुजुर्ग हो रहे हमले में घायल

मेरठ शहर में आवारा कुत्तों का आतंक किसी से छिपा नहीं है। गलियों, मोहल्लों और कॉलोनियों में घूमते बेसहारा कुत्ते रोजाना लोगों को काट रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों पर हमले आम हो चुके हैं। जिला अस्पताल में रेबीज इंजेक्शन के लिए लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि हालात कितने भयावह हो चुके हैं। सवाल यह है कि जब शासन हर साल करीब एक करोड़ रुपये नगर निगम को आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए दे रहा है फिर भी शहर की जनता आज भी दहशत में जी रही है। चिकित्सकों का कहना है कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है और कुत्ता काटने के बाद तुरंत वैक्सीन लगवाना जरूरी है। लापरवाही से जान भी जा सकती है।

नसबंदी कराने से ही बनेगी बात

स्थानीय लोगों ने नगर निगम से मांग की है कि आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी अभियान तेज किया जाए और मोहल्लों में घूम रहे खूंखार कुत्तों को शेल्टर होम में भेजा जाए, ताकि शहरवासियों को इस दहशत से छुटकारा मिल सके। आपको बता दें कि, मेरठ में आवारा कुत्तों की समस्या बेकाबू हो चुकी है। एक करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद नसबंदी योजना नाकाम साबित हो रही है। रोजाना हमले और अस्पतालों में रेबीज इंजेक्शन की लंबी कतारें हालात की गंभीरता बता रही हैं। मेरठ में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में भारी दहशत का माहौल है।

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प्रमुख घटनाएं और आंकड़े

जानी थाना क्षेत्र के किठौली गांव में 58 वर्षीय किसान लख्मी सैनी को गन्ने के खेत में आवारा कुत्तों के झुंड ने नोंच-नोचकर मार डाला। सुसोला खुर्द गांव में 55 वर्षीय महिला सूरजमुखी की कुत्तों के हमले से मौत हो गई, और अक्खेपुर गांव में एक कुत्ते ने किशोरी समेत तीन महिलाओं को काटकर घायल कर दिया। इसके अलावा किठौली और आसपास के क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड ने राष्ट्रीय पक्षी मोर को भी अपना शिकार बनाया है।

मेरठ में आवारा कुत्ते को डांटने का विरोध करने पर चार युवकों ने 60 वर्षीय महिला की ईंट से कुचलकर हत्या कर दी। मेरठ शहर में आवारा कुत्तों की संख्या 1 लाख से अधिक बताई जा रही है। नगर निगम द्वारा एनिमल केयर फाउंडेशन के जरिए एबीसी सेंटर का संचालन किया जा रहा है, जहां रेस्क्यू और नसबंदी/टीकाकरण का कार्य किया जाता है। नगर निगम ने सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी निजी संस्था ‘श्याम हेल्पिंग इनसाइट’ को दी है। संस्था के इंचार्ज केशव कुमार के अनुसार यहां दो चिकित्सक, दो गाड़ियां, तीन कर्मचारी और चार केचर तैनात हैं। इतने सीमित संसाधनों के सहारे पूरे महानगर की समस्या सुलझाने का दावा करना अपने आप में मजाक है।

'लगातार जारी है अभियान'

नगर आयुक्त मेरठ सौरभ गंगवार ने कहा कि आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हां यह बात ठीक है कि, नसबंदी का कार्य सुस्त गति से चल रहा है। लेकिन, आने वाले समय में नसबंदी के कार्य में तेजी लाई जाएगी। ताकि, आवारा कुत्तों के आतंक से शहर वासियों को निजात मिल सके।

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