

आधी रात 12 बजे राधाकुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब
संतान सुख की आस में देश-विदेश से पहुंचे दंपत्ति
शंखनाद के साथ शुरू हुआ शाही स्नान
Ahoi Ashtami Royal Bath: भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा की ब्रजभूमि में एक ऐसा पवित्र तीर्थ है, जहां अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि में पति-पत्नी एक साथ स्नान कर संतान सुख की कामना करते हैं। मान्यता है कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर राधाकुंड में मध्यरात्रि के समय स्नान और पूजा-अर्चना करने से निःसंतान दंपत्तियों की मनोकामना पूरी होती है।
इसी धार्मिक विश्वास और राधारानी के प्रति अटूट आस्था के चलते विश्वविख्यात तीर्थ राधाकुंड में अहोई अष्टमी पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचे। मध्यरात्रि ठीक 12 बजे शंखनाद और घंटे-घड़ियाल की गूंज के बीच शाही स्नान शुरू हुआ। हजारों नवदंपत्तियों ने अपने जीवनसाथी के साथ पवित्र कुंड में डुबकी लगाकर राधारानी से संतान सुख का आशीर्वाद मांगा।
ब्रज की धार्मिक परंपराओं में राधाकुंड का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। गोवर्धन धाम में स्थित इस पवित्र कुंड को भगवान श्रीराधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं से जुड़ा तीर्थ माना जाता है। अहोई अष्टमी पर यहां होने वाला मध्यरात्रि का स्नान देशभर में प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि इस दिन राधाकुंड में स्नान करने वाले निःसंतान दंपत्तियों को राधारानी की कृपा से संतान सुख प्राप्त होता है। वहीं, जिन दंपत्तियों के बच्चे हैं, वे अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।
अहोई अष्टमी के पर्व पर राधाकुंड के घाटों पर शाम से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आए दंपत्ति मध्यरात्रि में होने वाले पवित्र स्नान की प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही घड़ी की सुइयां रात के 12 बजे पहुंचीं, शंखनाद और घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के साथ शाही स्नान का शुभारंभ हो गया। राधे-राधे और राधारानी के जयकारों से पूरा तीर्थ क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और राधारानी के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामना रखी।
मध्यरात्रि 12 बजे से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला ब्रह्ममुहूर्त सुबह करीब चार बजे तक लगातार चलता रहा। इस दौरान राधाकुंड के प्रमुख घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दिखाई दी। कोई दंपत्ति वर्षों से संतान प्राप्ति की मनोकामना लेकर पहुंचा था तो कोई अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु जीवन के लिए प्रार्थना कर रहा था। हजारों नवविवाहित जोड़ों ने भी एक साथ स्नान कर अपने वैवाहिक जीवन में संतान सुख की कामना की।
राधाकुंड में स्नान करने पहुंचे श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था और विश्वास का भाव दिखाई दिया। दंपत्तियों ने बताया कि वे अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में स्नान करने की धार्मिक परंपरा को मानते हैं। इसी विश्वास के साथ वे दूर-दराज से यहां पहुंचे हैं। उन्हें भरोसा है कि भगवान श्रीराधा-कृष्ण और राधारानी की कृपा से उनकी मनोकामना पूरी होगी। कई श्रद्धालुओं ने अपनी संतान के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन के लिए भी विशेष पूजा-अर्चना की।
राधाकुंड में अहोई अष्टमी का स्नान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ब्रज की प्राचीन आस्था, परंपरा और राधारानी के प्रति श्रद्धालुओं के समर्पण का प्रतीक है। यही वजह है कि हर वर्ष इस विशेष अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
अहोई अष्टमी मेले में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। पुलिस उपमहानिरीक्षक आगरा रेंज, जिलाधिकारी मथुरा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा ने संयुक्त रूप से राधाकुंड क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रमुख घाटों पर सुरक्षा, बैरिकेडिंग, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता संबंधी इंतजामों का बारीकी से जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने राधाकुंड को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों और गलियों में पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था परखी। घाटों पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए गए कि श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार सुचारु रखा जाए। स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं से विनम्रता के साथ आगे बढ़ने की अपील की जाए, ताकि कतार में लगे अन्य लोगों को भी आसानी से स्नान का अवसर मिल सके। भीड़ नियंत्रण, घाटों की सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता रही।
अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में उमड़ा आस्था का सैलाब एक बार फिर ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का साक्षी बना। आधी रात को राधारानी के जयकारों के बीच हुआ शाही स्नान हजारों दंपत्तियों के लिए उम्मीद, विश्वास और प्रार्थना का विशेष अवसर रहा। संतान सुख की अभिलाषा हो या बच्चों की लंबी उम्र की कामना, हर श्रद्धालु राधारानी के दरबार में अपनी मनोकामना लेकर पहुंचा। इसी अटूट आस्था के कारण राधाकुंड का अहोई अष्टमी मेला देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है।