Mathura: द्वारकाधीश मंदिर में धूमधाम से निकली रथयात्रा, ठाकुर जी के दिव्य दर्शन को उमड़े हजारों श्रद्धालु

Mathura Rath Yatra: मथुरा के ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में पारंपरिक श्रद्धा और भक्ति के साथ भव्य रथयात्रा महोत्सव आयोजित किया गया। ठाकुर द्वारकाधीश महाराज रथ में विराजमान होकर भक्तों को दिव्य दर्शन दिए।
Grand Rath Yatra Festival Celebrated at Mathura’s Dwarkadhish Temple Amid Devotion and Festivity
ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर मथुरा (सोर्स- फोटो नवभारत)
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Dwarkadhish Temple Mathura: मथुरा के पुष्टिमार्ग संप्रदाय के प्रसिद्ध ठाकुर द्वारकाधीश मंदिर में बुधवार को पारंपरिक श्रद्धा और भक्ति के साथ भव्य रथयात्रा महोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ठाकुर द्वारकाधीश महाराज रथ में विराजमान होकर मंदिर प्रांगण में भ्रमण के लिए निकले और हजारों श्रद्धालुओं को दिव्य दर्शन दिए। पूरे मंदिर परिसर में जयकारों, भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक महोत्सव में भाग लिया।

सुबह 10 बजे खोली गई रथयात्रा की विशेष झांकी

मंदिर के विधि एवं मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि यह आयोजन मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज तृतीय पीठाधीश्वर की आज्ञा एवं गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। रथयात्रा महोत्सव के दौरान ठाकुर जी के दर्शनों के लिए विशेष समय-सारणी निर्धारित की गई थी।

प्रातःकाल मंगला एवं श्रृंगार दर्शन के बाद सुबह 10 बजे रथयात्रा की विशेष झांकी खोली गई। इसके उपरांत दोपहर 1:30 बजे से 2:30 बजे तक अन्य विशेष झांकियों के दर्शन हुए। वहीं सायंकाल 4:30 से 5 बजे तक शयन दर्शन के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने ठाकुर जी के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

पूर्णतः लकड़ी से निर्मित होता है भगवान जगन्नाथ का रथ

धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण, बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ जगन्नाथ पुरी में नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इसी परंपरा के प्रतीक स्वरूप द्वारकाधीश मंदिर में भी रथयात्रा महोत्सव आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का रथ पूर्णतः लकड़ी से निर्मित होता है और इसके निर्माण में लोहे की एक भी कील का प्रयोग नहीं किया जाता।

रथयात्रा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ को चावल का विशेष भोग अर्पित किया जाता है। वहीं पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार ठाकुर द्वारकाधीश महाराज को आम, जामुन तथा घोड़ों के लिए चने की दाल का प्रसाद अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।

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