Mathura: अनंत चतुर्दशी पर गोवर्धन में गिरिराज महाराज का अलौकिक श्रृंगार, 21 हजार किलो छप्पन भोग अर्पित

Anant Chaturdashi Govardhan Chhappan Bhog: मथुरा के गोवर्धन धाम में अनंत चतुर्दशी पर गिरिराज महाराज का भव्य श्रृंगार किया गया। यहां 21 हजार किलो छप्पन भोग अर्पित हुआ और देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचे।
Govardhan Chhappan Bhog 2026: Giriraj Maharaj Adorned with Jewels, 21000 Kg Bhog Offered
गिरिराज महाराज (सोर्स- फोटो नवभारत)
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 अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर मथुरा के गोवर्धन धाम में गिरिराज महाराज का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग स्थित संत गया प्रसाद समाधि स्थल के सामने आयोजित छप्पन भोग उत्सव में गिरिराज जी महाराज को हीरे, मोती, पन्ना और विभिन्न जवाहरात से सजाया गया। भगवान को सोने-चांदी की बांसुरी धारण कराई गई और कमल पुष्प पर विराजमान कराकर भव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। आयोजन के दौरान गिरिराज महाराज के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर मथुरा के गोवर्धन धाम में गिरिराज महाराज का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया। गोवर्धन परिक्रमा मार्ग स्थित संत गया प्रसाद समाधि स्थल के सामने आयोजित छप्पन भोग उत्सव में गिरिराज जी महाराज को हीरे, मोती, पन्ना और विभिन्न जवाहरात से सजाया गया। भगवान को सोने-चांदी की बांसुरी धारण कराई गई और कमल पुष्प पर विराजमान कराकर भव्य छप्पन भोग अर्पित किया गया। आयोजन के दौरान गिरिराज महाराज के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। (सोर्स- फोटो नवभारत)
इस बार गिरिराज महाराज का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान को दिव्य वस्त्र और आभूषण धारण कराने के बाद सोने-चांदी के रथ पर विराजमान कराया गया। हाथ में सोने की बांसुरी और अधरों पर बांसुरी धारण किए गिरिराज महाराज का स्वरूप ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हों। भगवान के समक्ष शुद्ध देशी घी से तैयार किए गए हजारों किलो व्यंजन और मिष्ठान्नों से छप्पन भोग सजाया गया।
इस बार गिरिराज महाराज का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान को दिव्य वस्त्र और आभूषण धारण कराने के बाद सोने-चांदी के रथ पर विराजमान कराया गया। हाथ में सोने की बांसुरी और अधरों पर बांसुरी धारण किए गिरिराज महाराज का स्वरूप ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो स्वयं भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए विराजमान हों। भगवान के समक्ष शुद्ध देशी घी से तैयार किए गए हजारों किलो व्यंजन और मिष्ठान्नों से छप्पन भोग सजाया गया।(सोर्स- फोटो नवभारत)
आयोजकों के मुताबिक इस वर्ष करीब 21 हजार किलो के छप्पन भोग का आयोजन किया गया। विभिन्न प्रकार के व्यंजन, मिष्ठान्न और पकवान भगवान को समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने छप्पन भोग की भव्य झांकी के दर्शन किए और भगवान से परिवार, समाज तथा देश की सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना की।
आयोजकों के मुताबिक इस वर्ष करीब 21 हजार किलो के छप्पन भोग का आयोजन किया गया। विभिन्न प्रकार के व्यंजन, मिष्ठान्न और पकवान भगवान को समर्पित किए गए। श्रद्धालुओं ने छप्पन भोग की भव्य झांकी के दर्शन किए और भगवान से परिवार, समाज तथा देश की सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना की।(सोर्स- फोटो नवभारत)
धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में जब देवराज इंद्र ने बृजवासियों पर अपना प्रकोप दिखाया और लगातार वर्षा होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर धारण कर लिया था। सात दिन तक भगवान ने गोवर्धन पर्वत को धारण कर बृजवासियों को वर्षा और इंद्र के प्रकोप से बचाया। इसके बाद बृजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किया। मान्यता है कि उसी परंपरा का आज भी बृज में श्रद्धा और भक्ति के साथ निर्वहन किया जा रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार द्वापर युग में जब देवराज इंद्र ने बृजवासियों पर अपना प्रकोप दिखाया और लगातार वर्षा होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर धारण कर लिया था। सात दिन तक भगवान ने गोवर्धन पर्वत को धारण कर बृजवासियों को वर्षा और इंद्र के प्रकोप से बचाया। इसके बाद बृजवासियों ने भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन भोग अर्पित किया। मान्यता है कि उसी परंपरा का आज भी बृज में श्रद्धा और भक्ति के साथ निर्वहन किया जा रहा है।(सोर्स- फोटो नवभारत)
गोवर्धन में आयोजित इस छप्पन भोग उत्सव के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। भक्तों के लिए गिरिराज महाराज का अलौकिक स्वरूप आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि हर वर्ष श्रद्धालुओं को इस आयोजन का इंतजार रहता है और बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर गिरिराज महाराज के दर्शन करते हैं।
गोवर्धन में आयोजित इस छप्पन भोग उत्सव के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। भक्तों के लिए गिरिराज महाराज का अलौकिक स्वरूप आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। आयोजन समिति से जुड़े लोगों ने बताया कि हर वर्ष श्रद्धालुओं को इस आयोजन का इंतजार रहता है और बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचकर गिरिराज महाराज के दर्शन करते हैं।(सोर्स- फोटो नवभारत)
आयोजकों के अनुसार इस धार्मिक आयोजन की परंपरा पिछले 41 वर्षों से लगातार चली आ रही है।  गिरिराज महाराज के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भक्तों ने जयकारे लगाए और भक्ति में डूबे नजर आए। गिरिराज सेवा समिति के अध्यक्ष मुरारी लाल अग्रवाल घी वाले ने बताया कि  बताया कि  41 वां 56 भोग है और इसमें भगवान को 21 तरह की जड़ी बूटियां और 21हीं नदियों के जल से अथवा सुरभि गाय के दूध से गिर्राज भगवान का  अभिषेक कराया जाता है, उसकी पश्चात ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित  किये जाते है, 21000 किलो का प्रसाद प्रति साल भगवान को अर्पित किया जाता है
आयोजकों के अनुसार इस धार्मिक आयोजन की परंपरा पिछले 41 वर्षों से लगातार चली आ रही है। गिरिराज महाराज के मनोहारी स्वरूप के दर्शन कर भक्तों ने जयकारे लगाए और भक्ति में डूबे नजर आए। गिरिराज सेवा समिति के अध्यक्ष मुरारी लाल अग्रवाल घी वाले ने बताया कि बताया कि 41 वां 56 भोग है और इसमें भगवान को 21 तरह की जड़ी बूटियां और 21हीं नदियों के जल से अथवा सुरभि गाय के दूध से गिर्राज भगवान का अभिषेक कराया जाता है, उसकी पश्चात ठाकुर जी को छप्पन भोग अर्पित किये जाते है, 21000 किलो का प्रसाद प्रति साल भगवान को अर्पित किया जाता है (सोर्स- फोटो नवभारत)

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