

Highlights:
SIR के बहाने बीजेपी का संगठन टेस्ट
2027 से पहले सड़क पर उतरी पूरी ताकत
'लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ' अभियान के तहत पदयात्रा शुरू
Shivraj Singh Chouhan Speech In Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है लेकिन बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियों का एक अहम संकेत दे दिया है। पार्टी की ओर से शुरू किया गया 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान पहली नजर में भले ही विपक्ष के SIR विरोध का जवाब दिखाई दे रहा हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने इससे कहीं ज्यादा बड़े हैं। छह संगठनात्मक क्षेत्रों में एक साथ पदयात्रा निकालने और डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं को जुटाने की तैयारी के जरिए बीजेपी दरअसल चुनाव से पहले अपने संगठन की सक्रियता, नेताओं की पकड़ और कार्यकर्ताओं की जमीनी ताकत को परखने की कोशिश कर रही है।
मंगलवार को लखनऊ में अवध क्षेत्र की पदयात्रा में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत बीजेपी और एनडीए के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी ने इस अभियान को राजनीतिक रूप से अहम बना दिया। कार्यकर्ताओं की भीड़, पार्टी के झंडे और नारों के बीच बीजेपी ने यह दिखाने की कोशिश की कि चुनावी मुकाबले से पहले उसका संगठन सड़क पर उतरने के लिए तैयार है।
SIR को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही हैं। विपक्ष इसे मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। बीजेपी ने इसी मुद्दे को अपने अभियान का केंद्र बनाकर राजनीतिक जवाब देने की रणनीति अपनाई है।
लेकिन इस अभियान का एक दूसरा पहलू भी है। बीजेपी विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देने के साथ अपने कार्यकर्ताओं को एक साझा मुद्दे पर सक्रिय कर रही है। इससे पार्टी को बूथ और स्थानीय स्तर तक संगठन की मौजूदगी का संदेश देने का मौका मिल रहा है। चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को लगातार एक्टिव रखना किसी भी राजनीतिक दल के लिए बड़ी चुनौती होती है।
बीजेपी ने प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में पदयात्रा निकालने की योजना बनाई है। हर क्षेत्र में करीब 25 हजार कार्यकर्ताओं को जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। यानी पूरे प्रदेश में करीब डेढ़ लाख कार्यकर्ताओं की भागीदारी का दावा है।
इस आयोजन में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और सहयोगी दलों के प्रमुख चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है। लखनऊ में शिवराज सिंह चौहान, बरेली में जेपी नड्डा, प्रयागराज में केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में ब्रजेश पाठक की मौजूदगी के जरिए पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व की सक्रियता भी दिखा रही है।
यहां एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश एनडीए की एकजुटता का भी है। ओमप्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद जैसे सहयोगी दलों के नेताओं की भागीदारी बताती है कि बीजेपी चुनाव से पहले अपने गठबंधन को भी सार्वजनिक रूप से एकजुट दिखाना चाहती है।
2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के सामने केवल विपक्ष से मुकाबला करने की चुनौती नहीं है, बल्कि अपने संगठन को लगातार सक्रिय रखने की भी जरूरत है। पदयात्रा के जरिए पार्टी ये देखने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग क्षेत्रों में उसके नेता कितने सक्रिय हैं और कार्यकर्ताओं को कितनी संख्या में मैदान में उतारा जा सकता है।
तीन दिवसीय अभियान का समापन 5 नवंबर को गाजियाबाद में होगा, जहां पश्चिम क्षेत्र की पदयात्रा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। इस तरह पार्टी ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े चेहरों को उतारकर अभियान को व्यापक राजनीतिक स्वरूप दिया है।
कुल मिलाकर बीजेपी का यह अभियान केवल SIR के समर्थन या विपक्ष के विरोध तक सीमित नहीं दिखता। इसके जरिए पार्टी चुनाव से पहले अपने संगठन को सक्रिय करने, एनडीए की एकजुटता दिखाने और राजनीतिक माहौल में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अब इस शक्ति प्रदर्शन की असली परीक्षा सड़कों पर जुटने वाली भीड़ से आगे बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता और चुनावी नतीजों में होगी।
रिपोर्ट- ईशांक दीक्षित