धर्मेन्द्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए...अजय राय ने पेपर लीक मामले पर BJP को घेरा, जानें क्या कहा

UP Congress Ajay Rai: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने नीट पेपर लीक, परीक्षा अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
Ajay Rai Targets Centre Over Exam Leaks, Demands Education Minister's Resignation
अजय राय (फोटो नवभारत)
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UP Congress Leader Ajay Rai Statement: उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2018, 2021, 2022, 2024, 2026 में नीट परीक्षा में गड़बड़ियां एवं पेपरलीक हुए। इसके पूर्व भी 2015 में एआईपीएमटी(वर्तमान में नीट) का भी पेपरलीक हो चुका है।

देश में युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ लगातार हो रही भयावह त्रासदी के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है।

नीट परीक्षा को लेकर उठाया सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विगत 03 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा जिसमें कुल 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे उसमें बड़े पैमाने पर प्रश्न लीक हुए जिसकी खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में सार्वजनिक हुए। दबाव में आयी केन्द्र सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और दुबारा परीक्षा कराये जाने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली नीट परीक्षा के अलावा सीबीएससी की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में चाहे लेखपाल भर्ती परीक्षा हो, यूपीएसआई, पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा हो, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा हो, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा हो, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा हो, ऐसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के माध्यम से भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयीं। हाल ही में हुई नीट परीक्षा के पेपर लीक के बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा आवाज उठाने एवं सड़कों पर संघर्ष करने के चलते सरकार को पुनः परीक्षा कराने का निर्णय लेना पड़ा।

छात्रो पर मानसिक तनाव का दबाव

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं। कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। राजस्थान में प्रदीप मेघवाल, दिल्ली में अंशिका पाण्डेय, उ0प्र0 में रितिक मिश्रा व शिवानी यादव, गोवा में सिद्धार्थ हेगड़े, कर्नाटक में भाग्यश्री, मध्य प्रदेश में आकांक्षा चतुर्वेदी, राजस्थान में उमेश माली और रेणु मीणा, उत्तराखण्ड में रिया कुमारी थापा, तमिलनाडु में अनुकीर्तना, गुजरात में कहान पटेल ने मानसिक तनाव में अपनी जान दे दी। दुर्भाग्यपूर्ण है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र छपने के बाद बिचौलियों के जरिए परीक्षा से पहले बड़ी संख्या में प्रश्नपत्र बेंचे जाते हैं। जांच में कुछ छात्रों ने बताया है कि उन्होने लीक पेपर के लिए 25हजार से 40 लाख रूपये तक चुकाये।

देश भर में लगभग 90 से अधिक पेपर लीक

पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं यानी लगभग हर वर्ष दो पेपर लीक हुए हैं। अब तक देश भर में लगभग 90 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर है। बार-बार पेपर लीक और छात्रों, अभिभावकों की पीड़ा और दर्जन भर छात्रों की आत्महत्या से आहत राहुल गांधी  ने छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करके शिक्षा व्यवस्था एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में अमूलचूल परिवर्तन के लिए सुझाव प्राप्त करने हेतु ‘छात्रों की गूंज’, कार्यक्रम के माध्यम से कार्यक्रमों की एक श्रंखला ‘कोटा महारैली’ से आरम्भ की।

राय ने कहा कि राहुल गांधी ने कोटा में छात्र संवाद कार्यक्रम में कहा कि एजुकेशन सिस्टम हिंदुस्तान के सबसे ग़रीब और मिडल क्लास लोगों से नीट परीक्षा के लिए हिन्दुस्तान के शिक्षा बजट के बराबर पैसा खर्च करवाता है। 22 लाख छात्रों की नीट परीक्षा की तैयारी का औसत खर्च एक लाख बत्तीस हजार करोड़ रूपये आता है जो हिन्दुस्तान के मौजूदा शिक्षा बजट एक लाख चालीस हजार करोड़ के करीब है।

शिक्षा पर खर्च होते है देश के पांच प्रमुख मंत्रालयों के बराबर बजट

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश की पांच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं-नीट, एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई के लिए उतना पैसा खर्च होता है जो कि भारत सरकार के शिक्षा बजट का तीन गुना है। इसको इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है कि-एसएससी-कुल छात्र 2 करोड़ खर्च 0.2 लाख करोड़। यूपीएससी-कुल छात्र 5 लाख खर्च 0.25 लाख करोड़। आरआरबी- कुल छात्र 3.58करोड़ खर्च 0.36 लाख करोड़।

जेईई-कुल छात्र 15 लाख खर्च 1.3 लाख करोड़। नीट- कुल छात्र 22 लाख खर्च 1.32 लाख करोड़। उन्होने कहा कि जेन  परिवार 3.5लाख करोड़ रूपये शिक्षा पर खर्च करते हैं जो देश के पांच प्रमुख मंत्रालयों के बजट के लगभग बराबर है जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, विज्ञान तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रालय शामिल है। (स्रोत-एसएससी, एनटीए, इण्डियन एक्सप्रेस, मीडिया रिपोर्ट्स, कोचिंग सेन्टर)।

राय ने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था असफलता के चरम पर है। यह प्रत्येक एक हजार छात्रों में से महज 12 छात्रों को सैलरी वाले जॉब उपलब्ध कराता है। शेष 297 बेरोजगार अथवा बिना काम के होकर कर्ज, नशा, नफरत, नकारापन की राह पर चले आते हैं। 691 छात्रों के हिस्से अनौपचारिक और असुरक्षित काम आता है जिसमें गिग वर्क, मनरेगा, स्वरोजगार आदि शामिल हैं। 29.1 प्रतिशत स्नातक युवा बेरोजगार हैं और छात्रों की आत्महत्या की दर पिछले एक दशक में 65 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

राय ने कहा कि छात्रों की गूंज कार्यक्रम के माध्यम से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक नई शिक्षा व्यवस्था की नींव रखना चाहते हैं जिसमें देश भर के छात्रों की आवाज शामिल हो। एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था जो युवाओं को बड़े सपने देखने का मौका दे, सपनों को पूरा करने में मदद करे और खर्च भी छात्रों के अभिभावकों की क्षमता के अनुरूप हो।

एटीए सरकार को जवाबदेह है न कि छात्रों को

राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से प्रत्येक 3000 प्रतियोगी अभ्यर्थियों में से एक आईएएस बनता है। 30 आईआईटी में जाते हैं और 180 डाक्टर बनते हैं बाकी को यह सिस्टम रिजेक्ट कर देता है। यह एक रिजेक्शन सिस्टम है। एनटीए के अन्तर्गत सभी बड़ी परीक्षाएं ला दी गयी हैं, एटीए सरकार को जवाबदेह है न कि छात्रों को। यदि किसी एक परीक्षा में गड़बड़ी होती है तो उसका असर एक साथ लाखों छात्रों पर पड़ता है और इस संस्था पर स्वतंत्र निगरानी की व्यापक कमी है। जिसके कारण यह संस्था बेलगाम है और भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबी है।

एनटीए, जिसके द्वारा नीट सहित तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित होती है वह लगातार सवालों के घेरे में है, 2024 में भी बड़े पैमाने पर नीट प्रश्नपत्र लीक हुए थे। तत्कालीन एनटीए के महानिदेशक को पद से हटाना पड़ा था किन्तु बाद में उन्हें बड़े पद से नवाजा गया। इस बार पुनः महानिदेशक शक के घेरे में हैं। आखिर एनटीए सरकार की मजबूरी है या पेपर लीक के लिए एनटीए जरूरी है? जब पूर्व में एनटीए शक के घेरे में आयी और पेपर लीक हुआ तो सरकार ने कड़े कदम क्यों नहीं उठाये।

राय ने कहा कि राहुल गांधी  छात्रों की बात सुनना चाहते हैं और उन विचारों से अवगत होकर छात्रों के कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहते हैं। जिससे शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सके। छात्रों की गूंज महारैली मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के विरूद्ध एक विरोध प्रदर्शन तथा शिक्षा व्यवस्था के पुनरूत्थान का अभियान है जो पूरे देश एवं संसद में  राहुल गांधी  के नेतृत्व में चलाया जा रहा है।

महा भ्रष्टाचार का अंश मात्र है नीट और सीबीएससी का घोटाला

नीट और सीबीएससी का घोटाला इस महा भ्रष्टाचार का अंश मात्र है। पूरी शिक्षा व्यवस्था ही निजीकरण, केन्द्रीयकरण और संघीकरण के अधीन चल रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने शिक्षा व्यवस्था के बजट को आधा कर दिया है। एक दशक पहले जो 4.7 प्रतिशत था आज वह 2.4 प्रतिशत रह गया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2005 में लगभग 71 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे जबकि आज यह आंकड़ा सिर्फ 49 प्रतिशत है। इस दौरान लगभग लगभग 1 लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये और 50 हजार निजी स्कूल खुल गये। आज हर 100 कालेजों में से लगभग 80 निजी क्षेत्र के हैं। देश में लगभग हर घंटे एक सरकारी स्कूल बंद होता है। करीब दस लाख शिक्षकों के पद खाली हैं। 98 हजार 592 स्कूलों में लड़कियों के लिए सक्रिय शौचालय नहीं है।

आम परिवारों को महंगे निजी विद्यालयों की तरफ ढकेल दिया गया है। जिन परिवारों की सालाना आय दो लाख रूपये तक है उनको अपनी इनकम का 40 प्रतिशत बच्चों की शिक्षा पर खर्च करना पड़ रहा है यहां तक कि अपनी सम्पत्ति बेंचकर और कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है।

राय ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ एक वसूली तन्त्र बनकर रह गया है। इन्हीं पीड़ाओं को लेकर राहुल गांधी पूरे देश में छात्रों की गूंज कार्यक्रम अभियान के माध्यम से निष्पक्ष और सस्ती-बेहतर शिक्षा प्रणाली की आवाज बनेंगे। छात्रों की गूंज अभियान पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के अग्रिम संगठन एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के माध्यम से चलाया जाएगा। जिसमें राहुल गांधी ने कोटा से महा रैली के माध्यम से इस अभियान की शुरूआत की तथा प्रयागराज, पटना और दिल्ली में राहुल गांधी  छात्रों से संवाद कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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