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केशव मौर्य को बनाओ UP का मुख्यमंत्री…अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की दुखती रग पर रखा हाथ, सियासी बवाल तय!

Swami Avimukteshwarananda: शंकराचार्य ने बसंत पंचमी के पावन पर्व पर भी संगम में स्नान नहीं किया। उन्होंने कहा कि मुगल काल में भी पेशवाओं ने पालकी के साथ ही शंकराचार्य का स्नान सुनिश्चित कराया था।

  • Written By: अर्पित शुक्ला
Updated On: Jan 24, 2026 | 08:49 AM

केशव मौर्य, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मुख्यमंत्री योगी

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Swami Avimukteshwarananda on CM Yogi: प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान पर्व को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस मुद्दे पर शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश की सत्ता को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदेश की जिम्मेदारी किसी अकड़ वाले व्यक्ति की बजाय केशव मौर्य जैसे समझदार नेता के हाथ में होनी चाहिए।

एक न्यूज चैनल से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समझदार व्यक्ति हैं। उन्होंने माना कि अधिकारियों से गलती हुई है और इस विवाद को ज्यादा बढ़ाना ठीक नहीं है। उन्हें यह भी समझ है कि इस पूरे मामले से पार्टी को नुकसान हो रहा है। शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री वही होना चाहिए जो समझदारी से काम ले, न कि जिद या बदले की भावना पालकर बैठे।

बसंत पंचमी पर भी नहीं किया संगम स्नान

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भी संगम में स्नान नहीं किया। उन्होंने साफ कहा कि जब तक उन्हें ससम्मान स्नान नहीं कराया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। उन्होंने पालकी परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि यह शंकराचार्य की पुरानी परंपरा है और मुगल काल में भी पेशवाओं ने पालकी के साथ ही शंकराचार्य का स्नान कराया था। प्रशासन द्वारा इसे नई परंपरा बताना सरासर गलत है।

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विपक्षी नेताओं से मुलाकात पर क्या बोले?

विपक्षी दलों के नेताओं के उनसे मिलने को लेकर उठ रहे सवालों पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि अगर विपक्ष आ रहा है, तो भाजपा क्यों नहीं आ रही? भाजपा खुद को हिंदू पार्टी कहती है, फिर शंकराचार्य, दंडी संन्यासियों और बटुकों के अपमान पर वह चुप क्यों है? उन्होंने कहा कि अगर भाजपा यह मानती है कि उसका हर कदम सही है, तो जनता तय करेगी कि ऐसी सोच रखने वालों को आगे मौका दिया जाए या नहीं।

गौरतलब है कि यूपी भाजपा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच मतभेद की चर्चाएं अक्सर सामने आती रही हैं। पार्टी के भीतर एक खेमा योगी समर्थकों का माना जाता है, जबकि दूसरा केशव मौर्य का। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा यह विवाद इन अटकलों को एक बार फिर हवा देता नजर आ रहा है।

केशव प्रसाद मौर्य का बयान

गुरुवार को आजमगढ़ पहुंचे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करते हैं और उनसे अनुरोध करते हैं कि वह स्नान कर इस विषय को समाप्त करें। इस बयान को शंकराचार्य के पक्ष में माना जा रहा है और इसे विवाद शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

योगी आदित्यनाथ का पलटवार

वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए शंकराचार्य पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी को भी परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर करने की कोशिश करने वाले कई ‘कालनेमि’ मौजूद हैं, जिनसे सतर्क रहने की जरूरत है। योगी ने कहा कि एक संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं।

यह भी पढ़ें- 76 साल का हुआ उत्तर प्रदेश, लखनऊ के राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल में भव्य कार्यक्रम, अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

योगी आदित्यनाथ द्वारा ‘कालनेमि’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। रामायण में कालनेमि को रावण का मामा बताया गया है, जिसे हनुमान को रोकने के लिए भेजा गया था, लेकिन हनुमान ने उसका वध कर दिया था। मुख्यमंत्री का यह बयान अब सियासी और धार्मिक दोनों हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Frequently Asked Questions

  • Que: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद की वजह क्या है?

    Ans: मौनी अमावस्या पर संगम स्नान के दौरान पालकी परंपरा और सम्मानजनक स्नान को लेकर दोनों के बीच टकराव हुआ।

  • Que: शंकराचार्य ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का समर्थन क्यों किया?

    Ans: शंकराचार्य का कहना है कि केशव मौर्य समझदार हैं और विवाद से पार्टी को हो रहे नुकसान को समझते हैं।

  • Que: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमि’ बयान का क्या मतलब निकाला जा रहा है?

    Ans: इसे परंपराओं के नाम पर सनातन को कमजोर करने वालों के खिलाफ सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

Keshav maurya should be the chief minister of uttar pradesh swami avimukteshwarananda

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Published On: Jan 24, 2026 | 08:49 AM

Topics:  

  • Keshav Prasad Maurya
  • Prayagraj
  • Shankaracharya Swami Avimukteshwaranand
  • Uttar Pradesh

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