मायावती का 'मास्टर चाबी' वाला बड़ा संदेश, कांशीराम की जयंती पर क्यों गरमाई यूपी की सियासत?

Kanshi Ram Jayanti: बहुजन नायक कांशीराम की जयंती पर मायावती और मुख्यमंत्री योगी सहित बड़े नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। बसपा सुप्रीमो ने 'मास्टर चाबी' के जरिए सत्ता हासिल करने का संकल्प दोहराया।
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फोटो- सोशल मीडिया
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UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'बहुजन' शब्द को एक नई पहचान देने वाले मान्यवर कांशीराम की जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। सुबह से ही सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक, उनके अनुयायियों और राजनीतिक दिग्गजों के संदेशों की बाढ़ आ गई है।

आज के बदलते राजनीतिक माहौल में जब हर दल दलित और पिछड़े वर्ग को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहा है, कांशीराम की जयंती पर उनके विचार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं।

क्या है कांशीराम की 'सत्ता वाली मास्टर चाबी'?

बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस मौके पर अपने गुरु को याद करते हुए एक बेहद भावुक और रणनीतिक संदेश साझा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की सोच और उनके आंदोलन को गति देने के लिए न्योछावर कर दिया था। मायावती के अनुसार, कांशीराम का एकमात्र लक्ष्य उस कारवां को आगे बढ़ाना था जिसे बाबा साहेब शुरू करके गए थे, ताकि वंचित समाज सत्ता की मंजिल तक पहुंच सके। उन्होंने दलितों और पिछड़ों को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक आप 'मास्टर चाबी' यानी सत्ता हासिल नहीं करेंगे, तब तक संविधान में दिए गए अधिकारों को पूरी तरह जमीन पर नहीं उतारा जा सकेगा। मायावती ने जोर दिया कि सत्ता मिलने पर ही बहुजन समाज गुलामी और लाचारी से मुक्त होकर आत्मसम्मान के साथ जी सकेगा।

आखिर क्यों बीजेपी के लिए भी खास हैं कांशीराम?

सिर्फ बसपा ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने भी कांशीराम की विरासत को सम्मान देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें सामाजिक न्याय का सच्चा पुरोधा बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांशीराम ने अपना पूरा जीवन दलितों, शोषितों और वंचितों के उत्थान के लिए समर्पित किया था और उनका संघर्ष आज भी समाज के कमजोर वर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करता है। वहीं, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें वंचितों की सशक्त आवाज करार दिया। मौर्य के अनुसार, समानता और सामाजिक चेतना के लिए कांशीराम का संघर्ष आज भी हमें न्याय के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। सत्ता पक्ष के इन बयानों से साफ है कि कांशीराम की प्रासंगिकता आज भी हर राजनीतिक दल के लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

लखनऊ में कार्यकर्ताओं का महाजुटान

मैदानी स्तर पर इस दिवस को उत्सव की तरह मनाने की तैयारी लखनऊ के वीआईपी रोड स्थित कांशीराम स्मारक स्थल पर की गई है। बसपा कार्यकर्ताओं ने यहां एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसमें अवध और पूर्वांचल सहित राज्य के विभिन्न कोनों से हजारों समर्थकों के जुटने की उम्मीद है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायक उमाशंकर सिंह ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा कि वह एक जनप्रिय नेता थे जिन्होंने आजीवन समाज के भले के लिए काम किया। यह आयोजन न केवल श्रद्धांजलि देने का जरिया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले बसपा की संगठनात्मक ताकत दिखाने का एक बड़ा मंच भी साबित हो सकता है।

चंद्रशेखर आजाद ने कहा 'सोती कौम जगाई'?

राजनीति की नई लहर का प्रतिनिधित्व करने वाले भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी। उन्होंने कांशीराम को 'बहुजन नायक' बताते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐसी कौम को जगाया जो अपने अधिकारों को भूल चुकी थी। चंद्रशेखर ने इस दिन को अपनी पार्टी के छठवें स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया और कार्यकर्ताओं को बधाई दी।

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